हत्या के मामले में पूर्व सपा सांसद रिजवान जहीर गिरफ्तार विवाद और दलबदल का पुराना इतिहास है

Former SP MP Rizwan Zaheer arrested in murder case has a long history of controversy and defection

Newspoint24/संवाददाता  

 
 
बलरामपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद से जुड़े देवीपाटन मण्डल के बलरामपुर जिले में सपा नेता की हत्या के मामले में गिरफ्तार हुये सपा के पूर्व सांसद रिजवान जहीर का कानून अपने हाथ में लेने और राजनीतिक लाभ के लिये दलबदल का पुराना इतिहास रहा है।

बलरामपुर के तुलसीपुर थानाक्षेत्र में पुलिस ने सोमवार को कथित राजनीतिक रंजिश के चलते से हुई एक सपा नेता की हत्या के मामले में पूर्व सपा सांसद व पूर्वांचल के बाहुबली नेता रिजवान जहीर को पुलिस ने सोमवार को गिरफ्तार किया है।

करीब तीस साल से अपने राजनीतिक सफर के दौरान तीन बार विधायक व दो बार सांसद बने रिजवान जहीर सपा बसपा कांग्रेस व पीस पार्टी का दामन थाम कर राजनीतिक रसूख हासिल किया। अभी हाल ही में हुये पंचायत चुनाव में आगजनी व बलवा के आरोप में जहीर को जेल भेजा गया। इसको लेकर आपराधिक छवि के बाहुबलियों पर शिकंजा कसने वाली योगी सरकार के निर्देश पर रिजवान पर रासुका भी लगाया गया।

जेल से बाहर आते ही रिजवान ने पुनः विधानसभा चुनाव 2022 को लेकर गणित बैठाना शुरू कर दिया और अपनी पुत्री जेबा रिजवान को विधानसभा भेजने की तैयारियों में जुट गये। रिजवान ने अपनी इकलौती बेटी जेबा के साथ समाजवादी पार्टी (सपा) में 17 साल बाद वापसी की। इस बीच तुलसीपुर नगर पंचायत से अपनी पत्नी कहकशां को निर्दलीय अध्यक्ष बनवाकर सपा में शामिल होने वाले फिरोज उर्फ पप्पू ने तुलसीपुर विधानसभा सीट पर सपा टिकट की दावेदारी कर दी थी। इस कारण जहीर से सियासी खटपट शुरु हुयी। चर्चा है कि यही फिरोज की मौत का कारण भी बनी।

जहीर तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं

जहीर तीन बार विधायक और दो बार सांसद रह चुके हैं। वह 1989 में तुलसीपुर विधानसभा क्षेत्र से रिजवान जहीर निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़े और पहली बार विधायक बने।

उसके बाद रिजवान जहीर बहुजन समाज पार्टी में शामिल हुए।जहीर दो बार बीएसपी से विधायक रहे। उन्होंने 1996 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में बलरामपुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा लेकिन पराजित हो गए। इसके बाद 1998 में और 1999 में जहीर सपा के टिकट पर दो बार बलरामपुर लोक सभा सांसद बने।

सपा के तत्कालीन अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव से अनबन के कारण जहीर ने 2004 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी के टिकट पर चुनाव लड़ा और भाजपा के बृजभूषण शरण सिंह से हार का सामना किया। जहीर ने 2009 के लोकसभा चुनाव में एक बार फिर बीएसपी प्रत्याशी के रूप में श्रावस्ती लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा लेकिन कांग्रेस के विनय कुमार पांडे से पराजित हुआ।

जहीर ने 2014 में पीस पार्टी से लोकसभा चुनाव लड़ा और भाजपा के दद्दन मिश्रा से शिकस्त पायी। चुनाव के बाद रिजवान जहीर ने कांग्रेस पार्टी का हाथ थामा। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद और तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर ने तुलसीपुर पहुंचकर रिजवान जहीर को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कराई थी लेकिन कुछ ही दिनों बाद रिजवान जहीर का कांग्रेस पार्टी से मोहभंग हो गया और उसने फिर बसपा की सदस्यता ले ली।

हाल ही में उसने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से मिलकर सपा की सदस्यता ग्रहण कर 2022 का विधानसभा चुनाव लड़ने की तैयारी कर ली थी। माना जा रहा है कि आगामी चुनाव में जहीर अपनी बेटी जेबा रिजवान के लिए टिकट पाने की राजनैतिक बिसात बिछाई है।

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