देव दीपावली पर काशी में होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, नाव, मोटरबोट , क्रूज में सब जगह एडवांस बुकिंग, लोकल इकोनॉमी को जबरदस्त बूम मिला

देव दीपावली पर काशी में होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, नाव, मोटरबोट या क्रूज में सब जगह एडवांस बुकिंग, लोकल इकोनॉमी को जबरदस्त बूम मिला
काशी में 500 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल, 400 से ज्यादा गेस्ट हाउस, 250 से ज्यादा लॉज और धर्मशाला, 500 से ज्यादा पेइंग गेस्ट हाउस हैं। अब फिलहाल कहीं जगह खाली नहीं हैं। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता के अनुसार, बीते दो साल कोरोना महामारी की काली छाया थी। इससे सबसे ज्यादा पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ था।

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ
 
 
वाराणसी। काशी में उत्तरवाहिनी गंगा के अर्धचंद्राकार घाटों पर कल यानी सोमवार को देवता स्वर्ग से उतरेंगे और अपनी दीपावली मनाएंगे। विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के साथ ही काशी रिलीजियस और स्प्रिचुअल टूरिज्म का एक बड़ा सेंटर बन गई है। बीते सावन के महीने में विश्वनाथ धाम में एक करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। पांच करोड़ रुपए से ज्यादा का चढ़ावा चढ़ाया था।

इसके बाद अब देव दीपावली के विश्व विख्यात उत्सव पर काशी की लोकल इकोनॉमी को जबरदस्त बूम मिला है। यदि आज आप होटल, गेस्ट हाउस, धर्मशाला, नाव, मोटरबोट या क्रूज में जगह चाहते हैं तो आपको निराशा हाथ लगेगी।

साथ ही, सॉरी शब्द संग यही सुनने को मिलेगा कि पहले ही एडवांस बुकिंग हो गई थी। इस तरह से नाविकों से लेकर टूरिज्म से जुड़े सभी वर्ग के लोगों में देव दीपावली को लेकर जबरदस्त उत्साह है।

दो से ढाई लाख में हुई है बजड़ों की बुकिंग
काशी में 1500 छोटी-बड़ी नाव चलती हैं। इनमें हाथ से चलने वाली छोटी नाव से लेकर मोटरबोट और बजड़ा तक शामिल हैं। अस्सी घाट पर नाविक दीपक कुमार साहनी ने बताया कि देव दीपावली पर लगभग 40 लोगों के बजड़े की बुकिंग 2 से ढाई लाख रुपए में हुई है। छोटी नावों की बुकिंग लगभग 20 से 30 हजार रुपए में हुई है।

मोटरबोट का रेट 50 हजार से एक लाख रुपए है। नाविक समाज से प्रशासन की ओर से कहा गया है कि नाव ओवरलोड न हो और सुरक्षा के सभी मानकों का पालन कराना है। वहीं, क्रूज संचालक विकास मालवीय ने बताया कि 12 हजार रुपए प्रति व्यक्ति रेट रखा गया था। देव दीपावली पर क्रूज लगभग 3 घंटे तक गंगा में सैलानियों को भ्रमण कराएगा। क्रूज में फिलहाल जगह नहीं खाली है।

ठहरने के 1600 से ज्यादा जगह हाउसफुल
काशी में 500 से ज्यादा छोटे-बड़े होटल, 400 से ज्यादा गेस्ट हाउस, 250 से ज्यादा लॉज और धर्मशाला, 500 से ज्यादा पेइंग गेस्ट हाउस हैं। अब फिलहाल कहीं जगह खाली नहीं हैं। टूरिज्म वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष राहुल मेहता के अनुसार, बीते दो साल कोरोना महामारी की काली छाया थी। इससे सबसे ज्यादा पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ था।

बाबा विश्वनाथ की कृपा से अब सब कुछ सामान्य हो चुका है। ऐसे में देव दीपावली को देखते हुए लोगों ने पहले ही अपने ठहरने के लिए जगह रिजर्व कर ली थी। जाहिर-सी बात है कि देव दीपावली के लिए इतनी भारी संख्या में सैलानी आते हैं कि सामान्य दिनों की अपेक्षा बुकिंग का रेट भी बढ़ जाता है और होटल इंडस्ट्री से जुड़े लोग गदगद हैं।

80 लाख के फूल सिर्फ विश्वनाथ धाम में लगेंगे
देव दीपावली पर गंगा घाटों के साथ ही प्रमुख मठों और मंदिरों की सजावट का चलन भी है। इस बार अकेले विश्वनाथ धाम को 80 लाख रुपए के फूलों से सजाया जा रहा है। मलदहिया स्थित फूल मंडी के दुकानदार सूरज ने बताया कि देव दीपावली पर सजावट के लिए शहर भर में फूलों की रिकॉर्ड बिक्री होगी। एक अनुमान के अनुसार, ढाई करोड़ रुपए से ज्यादा के फूल देव दीपावली के दिन शहर में बिक जाएंगे।

25 लाख से ज्यादा दीये जगमगाएंगे
काशी के गंगा घाटों पर 10 लाख दीये प्रशासन की ओर से जलाए जाएंगे। वहीं, लोग अपने से 11 लाख दीये जलाएंगे। इसके अलावा वरुणा तट, मठों-मंदिरों और ग्रामीण इलाकों में तकरीबन 4 लाख दीये खप जाएंगे। इस तरह से लगभग 25 लाख दीये देव दीपावली पर पूरी काशी में जलेंगे। यह दीये वाराणसी के साथ ही पूर्वांचल के अन्य जिलों के कुम्हारों से मंगवाए गए हैं। दीपावली के 15 दिन बाद यह एक फिर यह बड़ा अवसर है कि जब दीये बनाने वाले कुम्हारों को कमाई का इतना बड़ा मौका मिला है।

अन्य वर्गों में भी जबरदस्त उत्साह
देव दीपावली के मद्देनजर ट्रेवेल्स के कामकाज से जुड़े लोगों, बनारसी साड़ी व लकड़ी के खिलौनों से जुड़े दुकानदारों, खान-पान की सामग्रियों से जुड़े दुकानदारों और तीर्थ पुरोहितों में भी जबरदस्त उत्साह है। दुकानदारों का कहना है कि जितनी ज्यादा संख्या में लोग आएंगे खरीदारी की संभावना उतनी ज्यादा बढ़ जाती है। बाहर से जो भी लोग आते हैं वह काशी की यादगार निशानी के तौर पर बनारसी साड़ी या लकड़ी के खिलौना या विश्वनाथ धाम का मॉडल जरूर ले जाते हैं।

 

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