WHO ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया , अब तक 80 देशों में फैला 

World Health Organization

Newspoint24/newsdesk/एजेंसी इनपुट के साथ

नई दिल्ली। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने मंकीपॉक्स को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित कर दिया है। बैठक में लंबी चर्चा के बाद WHO ने यह फैसला लिया है। मंकीपॉक्स अब तक 80 देशों में फैल चुका है। भारत में अब तक इस वायरस के 3 मामले सामने आए हैं।

उधर, अमेरिका में पहली बार दो बच्चों में यह संक्रमण पाया गया है। हेल्थ एजेंसी सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के मुताबिक एक बच्चा कैलिफोर्निया का है, वहीं दूसरा बच्चा नवजात है और अमेरिका का निवासी नहीं है।

स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि दोनों बच्चों की हालत स्थिर है। इलाज के लिए उन्हें एंटीवायरल दवा टेकोविरिमैट दी गई है। CDC के अनुसार यह दवा 8 साल से छोटे बच्चों को दी जानी चाहिए क्योंकि उन्हें गंभीर संक्रमण का खतरा होता है।

डब्ल्यूएचओ प्रमुख ने कहा, "एक महीने पहले मैंने यह आकलन करने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत आपातकालीन समिति बुलाई थी कि क्या बहु-देशीय मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। उस बैठक में अलग-अलग विचार व्यक्त किए गए थे। समिति ने सर्वसम्मति से माना कि प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व नहीं करता है। उस समय 47 देशों से मंकीपॉक्स के 3040 मामले सामने आए थे। तब से इसका प्रकोप  लगातार बढ़ रहा है और अब 75 देशों और क्षेत्रों से 16 हजार से अधिक मामले सामने आए हैं और पांच मौतें हुई हैं।" 

टेड्रोस ने जारी एक बयान में कहा

"विकसित हो रहे प्रकोप के आलोक में, मैंने इस सप्ताह के गुरुवार को ताजा आंकड़ों की समीक्षा करने और सलाह देने के लिए समिति का पुनर्गठन किया। सबूतों और मुद्दों पर सावधानीपूर्वक विचार करने के लिए मैं समिति को धन्यवाद देता हूं। इस मौके पर समिति इस बात पर आम सहमति तक पहुंचने में असमर्थ थी कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता के सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का प्रतिनिधित्व करता है। आज हम जो रिपोर्ट प्रकाशित कर रहे हैं उसमें समिति के सदस्यों ने इसके पक्ष और विपक्ष में कारण बताए हैं।"

"अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों के तहत, मुझे यह तय करने में पांच तत्वों पर विचार करने की आवश्यकता है कि क्या प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है। पहला, देशों द्वारा प्रदान की गई जानकारी- जो इस मामले में दिखाती है कि यह वायरस कई देशों में तेजी से फैल गया है, जिन्होंने इसे पहले नहीं देखा है। दूसरा, अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित करने के लिए तीन मानदंड। तीसरा, आपातकालीन समिति की सलाह। चौथा, वैज्ञानिक सिद्धांत, साक्ष्य और अन्य प्रासंगिक जानकारी और पांचवां, मानव स्वास्थ्य के लिए जोखिम, अंतरराष्ट्रीय प्रचार और अंतरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप की संभावना।"

टड्रोस ने आगे कहा, "डब्ल्यूएचओ का आकलन है कि यूरोपीय क्षेत्र को छोड़कर, मंकीपॉक्स का विश्व स्तर पर सभी क्षेत्रों में मध्यम जोखिम है। यह आगे अंतरराष्ट्रीय प्रसार का एक स्पष्ट जोखिम भी है, हालांकि अतंरराष्ट्रीय यातायात में हस्तक्षेप का जोखिम फिलहाल कम है। तो संक्षेप में हमारे पास एक प्रकोप है जो संचरण के नए तरीकों से दुनियाभर में तेजी से फैल गया है, जिसके बारे में हम बहुत कम जानते हैं और जो अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विनियमों में मानदंडों को पूरा करता है। इन सभी कारणों से मैंने तय किया है कि वैश्विक मंकीपॉक्स का प्रकोप अंतरराष्ट्रीय चिंता का एक सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल है।"

भारत में अब तक तीन मामले
भारत में अब तक मंकीपॉक्स के तीन मामले सामने आ चुके हैं। हाल ही में केरल में मंकीपॉक्स का तीसरा मामला सामने आया था। जुलाई की शुरुआत में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) से लौटे एक 35 वर्षीय युवक में मंकीपॉक्स के संक्रमण की पुष्टि हुई थी। केरल की स्वास्थ्य मंत्री वीणा जॉर्ज ने बताया था कि मलप्पुरम का रहने वाला युवक छह जुलाई को अपने गृह राज्य लौटा था और उसे 13 जुलाई से बुखार है। युवक का इलाज तिरुवनंतपुरम के मंजेरी मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। इससे पहले भारत में मंकीपॉक्स का दूसरा मामला केरल के कन्नूर जिले में दर्ज किया गया था। 13 जुलाई को दुबई से कन्नूर लौटे शख्स में संक्रमण की पुष्टि हुई थी। उसका इलाज तिरुवनंतपुरम के परियारम मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। वहीं, पहला मरीज भी केरल में ही मिला था। 12 जुलाई को यूएई से कोल्लम पहुंचे व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण दिखे थे।

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