समाज की जागृति के केन्द्र बने हमारे मंदिर : अरविंद भाई ओझा

Newspoint24/संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ

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मेरठ। अग्रसेन सरस्वती शिशु मंदिर की सहायतार्थ ब्रजघाट हापुड में चल रही कथा के विराम दिवस पर कथा व्यास अरविन्द भाई ओझा ने हनुमत कथा में हनुमान जी के जीवन लीला पर प्रकाश डालते हुए कहा हमारे मन्दिर केवल पूजा करने का स्थान नहीं है। हमारे मन्दिर समाज की जागृति के केन्द्र बनने चाहिए। हनुमान जी के मंदिर के साथ अगर अखाड़ा नहीं है तो मंदिर अभी अधुरा है।

कथा व्यास अरविंद भाई ओझा ने कहा कि हम गृहस्थ लोगों की जिम्मेदारी है कि गुरु और पुरोहित की जीवन यापन की व्यवस्था करें, जिससे वे अपने शास्त्र व राष्ट्र को बचाने के लिए युवाओं को संस्कारित कर सकें।

हनुमान चालीसा ऐसा ग्रन्थ है जो हमें भगवान तक पहुंचने का मन्त्र व पंथ बताता है। गुरु की व्याख्या करते हुए उन्होंने कहा कि जो भगवान से परमात्मा से जोड़े वही गुरु हो सकता है। जो वेदों और सनातन परम्परा से तोड़कर अपने से जोड़े वो गुरु नहीं हो सकता।

हनुमान जी राक्षसों की नगरी लंका में भी सज्जन लोगों की खोज करते हैं और उन्हें वहां विभीषण जी मिलते हैं। देश के महापुरुष तुलसीदास, समर्थ गुरु रामदास, महामना मालवीय आदि ने हनुमान जी के माध्मय से समाज जागरण करने के लिए काम किया।

रामलीला अखाड़े और महावीर दल खड़े किए। जीवन सरिता सुख और दुःख दो किनारों के बीच बहते हुए आगे बढ़ती है। जैसे नदी के दो किनारे एक साथ नहीं आ सकते, उसी प्रकार जीवन में सुख-दुख एक साथ नहीं आते।

अरविंद भाई ओझा ने कहा कि हनुमान जी ने भगवान के काम के लिए अपने नाम को मिटा दिया। लंका में हनुमान जी का नाम कई नहीं जानता केवल राम दूत के नाम से ही सब जानते हैं। लंका में माँ जानकी की स्थिति को देखकर हनुमान जी को अपना शिव रूप याद आ गया और उन्होंने अपने कोप से लंका को जला दिया। सुन्दर कांड में माँ जानकी हमें संदेश देना चाहती है की म्रत्यु का भय होने पर भी हमें अपने सतित्व की रक्षा कैसे करनी चाहिए। लंका विजय के बाद प्रभु श्रीराम ने हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि हनुमान मेरे सहित जो तेरी कीर्ति गाएगा, वो बिना प्रयास ही भाव सागर से पार हो जाएगा।

कथा व्यास ने कहा कि सुन्दर कांड की कथा अनुग्रह की कथा है। भगवान हमें बताना चाहते हैं कि जो मुझसे विमुख हो जाते हैं। मैं उन्हें सम्मुख करने के लिए स्वयं प्रयास करता हूं और हनुमान जी जैसे आचार्य को भी भेजता हूं। कथा में पुरा महादेव बागपत के स्वामी देवमुनि जी महाराज का सानिध्य रहा। मुख्य यजमान डॉ. रविन्द्र रहे।

इस अवसर पर राजीव दादू, कमल त्यागी, डॉ. हर्षवर्धन, राजपाल शर्मा, राधेश्याम शर्मा, दीपक शर्मा, अनिल चड्ढा, शिवकुमार हूण, परितोष आदि उपस्थित रहे।
 

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