पत्रकारिता को जीवंत बनाने के लिए लानी होगी मौलिकता : डॉ मनोज श्रीवास्तव

पत्रकारिता को जीवंत बनाने के लिए लानी होगी मौलिकता : डॉ मनोज श्रीवास्तव

Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ 

मेरठ। चौधरी चरण सिंह विवि के तिलक स्कूल ऑफ जर्नलिज्म के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने कहा कि पत्रकारिता की भाषा में आक्रमकता बढ़ रही है और मौलिकता का लोप हो रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान पत्रकारिता में तकनीकी का विकास तो हुआ लेकिन सम्पूर्ण रूप में मौलिकता की कमी हुई है।

आज स्वाध्याय समाप्त हो गया है। यदि हम अपनी संस्कृति और पत्रकारिता का विकास करना चाहते हैं तो स्वाध्याय के माध्यम से मौलिकता लानी होगी।

विद्या नॉलेज पार्क एवं विश्व संवाद केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को प्रख्यात साहित्यकार एवं पत्रकार बाबूराव विष्णु पराड़कर की जयंती पर विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया।

’वर्तमान हिन्दी पत्रकारिता में मौलिकता’ विषय पर विद्या इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग में आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता डॉ. मनोज श्रीवास्तव ने पराड़करजी के जीवन के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए वर्तमान हिन्दी पत्रकारिता में मौलिकता विषय पर व्याख्यान प्रस्तुत किया। मुख्य अतिथि अवकाश प्राप्त शिक्षक सुमंत डोगरा, तिलक स्कूल ऑफ मास कम्युनिकेशन के निदेशक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कुमार मौजूद रहे।

कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या इंस्टीट्यूट ऑफ फैशन टेक्नोलॉजी की निदेशिका डॉ. रीमा वार्ष्णेय ने तथा संचालन असिस्टेंट प्रोफेसर सूरज देव प्रसाद ने किया। डॉ. रीमा वार्ष्णेय ने कहा कि सही मायने में पराड़करजी ने चरितार्थ किया और अंग्रेजों के खिलाफ अखबार निकालकर हथियार की तरह उपयोग किया।

हमें पराड़करजी के जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि जिसमें दर्द सहने की क्षमता होगी, सही मायने में वही मील का पत्थर बन सकता है। इसके लिए व्यक्ति में समर्पण की भावना होनी चाहिये। इस अवसर पर सुरेंद्र सिंह, डॉ. ममता भाटिया, सोनाक्षी शर्मा आदि उपस्थित रहे।

Share this story