मां अन्नपूर्णा का 17 दिवसीय महाव्रत शुरू, महंत ने श्रद्धालुओं को दिया 17 गांठ वाला धागा

Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ

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वाराणसी । काशीपुराधिपति को जगत के पालन के लिए अन्नदान देने वाली अन्न-धन की देवी मां अन्नपूर्णा का 17 दिवसीय महाव्रत अगहन माह के कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि बुधवार से शुरू हो गया। श्रद्धालुओं ने श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिक्षेत्र स्थित अन्नपूर्णा के दरबार से दर्शन पूजन कर महाव्रत का संकल्प लेकर इसकी शुरूआत की।

मंदिर के महंत महन्त शंकरपुरी महाराज ने परम्परानुसार श्रद्धालुओं में 17 गांठ वाला धागा भी वितरित किया। 17 दिवसीय महाव्रत के अन्तिम दिन अगहन माह के शुक्ल पक्ष नौ दिसंबर को धान की बालियों से मां अन्नपूर्णा के विग्रह का खास श्रृंगार किया जाएगा।

वाराणसी सहित पूरे पूर्वांचल से किसान अपनी धान की फसल की बालियों को देवी के श्रृंगार के लिए भेजते हैं। महाव्रत में श्रद्धालु 17 गांठ वाला धागा धारण करते हैं। इसमें महिलाएं बाएं व पुरुष दाहिने हाथ में इसे धारण करते हैं। इसमें अन्न का सेवन वर्जित होता है।

केवल एक वक्त फलाहार किया जाता है वह भी बिना नमक का। माना जाता है कि इस महाव्रत के प्रसाद को घर में रखने से किसानों के परिवार में अन्नधन की कमी नही होती। फसल में बढ़ोत्तरी होती है। किसान मंदिर से प्रसाद स्वरूप मिले धान की बाली को दूसरी धान की फसल में मिला देते हैं।

मंदिर प्रशासन के अनुसार, यह महाव्रत 17 वर्ष 17 महीने 17 दिन का होता है। व्रत से माता दैविक, भौतिक सुख प्रदान करती है। परिवार में अन्न-धन और ऐश्वर्य की कमी नहीं होती है।

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