भारतीय स्वाधीनता संग्राम में सिक्ख गुरुओं का भी अतुलनीय योगदान : श्रीश देव पुजारी

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Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ

वाराणसी । आजादी का अमृत महोत्सव, चौरी चौरा महोत्सव, गुरु तेग बहादुर सिंह के 400वें जन्म शताब्दी के अवसर पर बुधवार को संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महासचिव श्रीश देव पुजारी ने सिख गुरू के कृतित्व को याद किया।

उन्होंने कहा कि भारतीय स्वाधीनता संग्राम में सिक्ख गुरुओं का भी अतुलनीय योगदान रहा। गुरु तेगबहादुर ने हिन्दुओं के संरक्षण के लिए अपना सर्वस्व बलिदान कर किया।

नामधारी सिक्ख परम्परा ने भी देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व बलिदान किया तथा गऊ रक्षा के लिए फाँसी पर चढ़ा दिये गये।

श्रीश देव पुजारी सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय के श्री सद्गुरु रामसिंह जी महाराज पीठ, तुलनात्मक धर्म दर्शन विभाग की ओर से परिसर में आयोजित संगोष्ठी को सम्बोधित कर रहे थे।

"भारतीय स्वाधीनता संग्राम-संघर्ष की गाथा" विषयक संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि देश को आजादी दिलाने वाले स्वाधीनता सेनानियों को सदा स्मरण करते रहना चाहिए।

स्वाधीनता संग्राम संघर्ष में हमारे स्वाधीनता सेनानियों ने जो संघर्ष किया, उस अनुपात में उन्हें विजय प्राप्त नहीं हुई। इसका कारण अलग-अलग संघर्ष है।

यदि ये संघर्ष मिलकर किये होते तो हमें लक्ष्य आसानी से प्राप्त हो जाता। पुजारी ने कहा कि यहीं परिस्थितियां आज भी है। अतः हमें संस्कृति के आधार पर संघटित होना ही होगा।

संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.हरेराम त्रिपाठी ने कहा कि मानव कल्याण और राष्ट्र कल्याण के लिये गुरू तेगबहादुर के योगदान को इतिहास सदैव स्मरण करेगा। मानव कल्याण के लिए अपना सर्वस्व बलिदान करने वाले गुरु तेगबहादुर ने नामधारी सिक्ख परम्परा, सामाजिक एवं राजनीतिक सुधारों के लिए जो कार्य किया वो आज भी प्रासंगिक हैं।

सनातन संस्कृति के संरक्षण में सिक्ख गुरुओं का अवदान भी निरन्तर स्मरणीय है। गुरु जगजीत सिंह महाराज ने जिस उद्देश्य से इस पीठ की स्थापना की थी यह पीठ उस उद्देश्य पर अग्रसर है।

संगोष्ठी में विषय प्रवर्तन करते हुए मंजीत सिंह ने नामधारी सिक्ख परम्परा के स्वाधीनता संग्राम संघर्ष की गाथा को बताया।

अतिथियों ने "सद्गुरु- सन्देश "नामक स्मारिका का विमोचन भी किया। संगोष्ठी की शुरूआत वैदिक और पौराणिक मंगलाचरण के बाद दीप प्रज्ज्वलन से हुई।

स्वागत भाषण विभागाध्यक्ष प्रो. हरिप्रसाद अधिकारी धन्यवाद ज्ञापन दर्शन संकायाध्यक्ष प्रो सुधाकर मिश्र, संचालन पीठ की निदेशक डॉ रेणु द्विवेदी ने किया। कार्यक्रम में प्रो. राम किशोर त्रिपाठी,प्रो. रामपूजन पान्डेय,प्रो. प्रेम नारायण सिंह,प्रो. शैलेश कुमार मिश्र,प्रो. राघवेन्द्र दुबे आदि उपस्थित रहे।
 

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