भारतीय बागवानी विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष बने सीएसए के कुलपति डॉ.डीआर सिंह

भारतीय बागवानी विज्ञान अकादमी के उपाध्यक्ष बने सीएसए के कुलपति डॉ.डीआर सिंह

Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ 

कानपुर । बागवानी के क्षेत्र में किसानों की आय दोगुनी को लेकर सीएसए में बागवानी से जुड़े शोधार्थी व वैज्ञानिक चार दिवसीय मंथन कर रहे हैं। मंथन के दूसरे दिन सीएसए के कुलपति डॉ.डीआर सिंह को भारतीय बागवानी विज्ञान अकादमी ने उपाध्यक्ष मनोनीत किया है।

चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विद्यालय (सीएसए) कानपुर में चल रही चार दिवसीय 9वीं भारतीय बागवानी सम्मेलन के दूसरे दिन शुक्रवार को भारतीय बागवानी विज्ञान अकादमी की हुई वार्षिक आम बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022-24 के लिए गठित समिति में सीएसए के कुलपति डॉक्टर डीआर सिंह को उपाध्यक्ष तथा डॉ ए. एस.ढत्त्त पंजाब कृषि विश्वविद्यालय लुधियाना, डॉ शैलेंद्र राजन निदेशक केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान लखनऊ, डॉक्टर प्रीतम कालिया आईएआरआई नई दिल्ली एवं डॉ बलराज सिंह पूर्व कुलपति कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर को समिति का एग्जीक्यूटिव काउंसलर बनाए जाने की घोषणा अकादमी के अध्यक्ष पद्म श्री डॉक्टर के एल चड्ढा द्वारा की गई।

अकादमी की इस सामान्य बैठक में अध्यक्ष पद्म श्री डॉक्टर के एल चड्ढा ने फलोत्पादन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए प्रोफेसर बीएन हजारिका अरुणाचल प्रदेश, डॉ आर ए कौशिक उदयपुर राजस्थान, डॉक्टर हरविंदर सिंह पंजाब, डॉ संजय कुमार द्विवेदी निदेशक डीआरडीओ नई दिल्ली तथा डॉक्टर हरे कृष्णा बनारस के साथ-साथ सब्जी विज्ञान में डॉक्टर आर एस पान झारखंड,डॉ राजेश कुमार बनारस, डॉक्टर आरके यादव नई दिल्ली को अकादमी की फेलोशिप से सम्मानित भी किया।

इसी क्रम में संगोष्ठी के तृतीय तकनीकी सत्र की अध्यक्षता डॉ टी जानकी रमन कुलपति बागवानी विश्वविद्यालय आंध्र प्रदेश तथा सह अध्यक्षता डॉ पी एल सरोज बीकानेर राजस्थान एवं डॉ सी पी सचान अधिष्ठाता दुग्ध विज्ञान इटावा ने की।

इस दौरान विभिन्न कम प्रयोग होने वाले विभिन्न फलों का मानव स्वास्थ्य एवं पोषण महत्व को देखते हुए देश के विभिन्न भागों में उनके उत्पादन एवं उपलब्धता बढ़ाने पर विशेष चर्चा की गई।

चतुर्थ तकनीकी सत्र में अनुपयुक्त भूमि का उद्यानिकी फसलें उगा कर समुचित उपयोग कर उनको विभिन्न फलों मुख्यता अनार, इमली, बेल के साथ अन्य फसलों को उत्पादित कर भूमि को उत्पादन हेतु योग्य बनाते हुए देश एवं प्रदेश में फलों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए गहन विचार विमर्श किया गया।

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