चम्पत राय के खिलाफ सीनियर डिवीजन सिविल जज अदालत में फकीरे राम मंदिर का बैनामा कराने के मामले में मुकदमा दायर

विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष एवं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय के खिलाफ सीनियर डिवीजन सिविल जज फैजाबाद की अदालत ने श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला के मंदिर के सौ मीटर दूरी पर फकीरेराम मंदिर का बैनामा कराने

Newspoint 24 / newsdesk

अयोध्या। विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) के उपाध्यक्ष एवं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय के खिलाफ सीनियर डिवीजन सिविल जज फैजाबाद की अदालत में फकीरे राम मंदिर का बैनामा कराने के मामले में एक मुकदमा दायर हुआ है । उन्हें छह अगस्त को अदालत में हाजिर होने के लिये नोटिस जारी किया गया है। 

शिवसेना के पूर्वांचल प्रमुख संतोष दूबे ने आज यहां यह जानकारी दी और कहा कि विश्व हिन्दू परिषद के उपाध्यक्ष एवं श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय के खिलाफ सीनियर डिवीजन सिविल जज फैजाबाद की अदालत ने श्रीरामजन्मभूमि पर विराजमान रामलला के मंदिर के सौ मीटर दूरी पर फकीरेराम मंदिर का बैनामा कराने के मामले में एक मुकदमा दायर हुआ है, जिसमें उन्हें अदालत ने छह अगस्त को हाजिर होने के लिये नोटिस जारी किया है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट के महामंत्री चम्पत राय ने फकीरे राम मंदिर के अवैध ढंग से कराये गये बैनामे को निरस्त करने और प्राचीन मंदिर को तोडऩे से रोकने के लिये यह मुकदमा सिविल जज की अदालत में किया गया है।

उन्होंने बताया कि फकीरे राम मंदिर के महंत रघुवर शरण द्वारा कराये गये दाखिल खारिज को भी चुनौती दी गयी है। फकीरे राम मंदिर में भगवान की भोग, आरती आज भी हो रही है। मूर्ति और मंदिर को वहां से न तोड़ा जाय और न हटाया जाय इस सम्बन्ध में अदालत में मुकदमा दायर किया गया है। उन्होंने बताया कि फकीरे राम मंदिर में रामकिशोर सिंह और कृपाशंकर दास ट्रस्टी के रूप में जाने जाते हैं। इस मुकदमे की पैरवी जगद्गुरू शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानन्द सरस्वती के शिष्य अविमुक्तेश्वरानंद तथा वरिष्ठ महा अधिवक्ता रणजीत लाल वर्मा, तरुण जीत वर्मा की तरफ से यह मुकदमा दायर किया गया है।


संतोष दूबे ने कहा कि अयोध्या की प्राचीनता को नष्ट नहीं होने दिया जायेगा। इसके लिये जो भी कानूनी लड़ाई लडनी होगी लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि जन-जन के आराध्य भगवान श्रीराम का भव्य मंदिर निर्माण हो यह सभी लोग चाहते हैं लेकिन उसके लिये भगवान श्रीराम के अन्य मंदिरों का अस्तित्व समाप्त करना यह कहां का न्याय है। उन्होंने बताया कि रामलला के भव्य मंदिर निर्माण के नाम पर साक्षी गोपाल फकीरे राम मंदिर, कौशल्या भवन, सीता रसोई रामजन्म स्थान सहित दर्जनों मंदिरों का अस्तित्व मिटा दिया गया है।

जबकि रामकोट क्षेत्र में पहचान इन्हीं मंदिरों से थी। उन्होंने कहा कि अयोध्या का विकास वे सभी चाहते हैं, लेकिन अयोध्यावासियों को उजाडक़र विकास की गंगा बहाना यह भगवान श्रीराम को भी मंजूर नहीं है। उन्होंने कहा कि भगवान राम के लिये हमने अपने सीने पर गोलियां खायी हैं लेकिन मनमानी रवैये से मन में पीड़ा हो रही है। भगवान का मंदिर बने यह देश के सभी रामभक्त चाहते हैं।

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