यूपी: सनातन संस्कृति के संवाहक थे स्वामी विवेकानन्द : राज्यमंत्री

Newspoint24.com/newsdesk

बलिया । राष्ट्रीय एकता मंच के तत्त्वावधान में टीडी कालेज के मनोरंजन हाल में विवेकानंद जयंती समारोह का आयोजन हुआ। इस अवसर पर 'वर्तमान परिप्रेक्ष्य में विवेकानन्द के विचारों की प्रासंगिकता' विषयक गोष्ठी भी आयोजित हुई। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि राज्य मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल, मुख्य वक्ता डॉ. बालमुकुंद  व विशिष्ट अतिथि जननायक चन्द्रशेखर विश्वविद्यालय की कुलपति डा. कल्पलता पाण्डेय ने मां सरस्वती, भारत माता और स्वामी विवेकानन्द के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया।

राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ल ने कहा कि भारत को जानने के लिए सबसे पहले विवेकानंद को जानना होगा। विवेकानंद ने सनातन संस्कृति के संवर्द्धन के लिए जीवन भर काम किया। कहा कि सनातन संस्कृति की संरक्षा के लिए सतत प्रयत्नशील रहने की जरूरत है। युवाओं का आह्वान किया कि चाहे परिस्थितियां कितनी भी प्रतिकूल हों, अपने सिद्धांतों से डिगना नहीं चाहिए। विवेकानंद ने सात समंदर पार भी अपने सिद्धांतों की तिलांजलि नहीं दी थी।

विशिष्ट अतिथि डा. कल्पलता पाण्डेय ने युवा दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि राष्ट्र का निर्माण सांस्कृतिक परक होता है। संस्कृति ही भारत की चिति का निर्माण करती है। भारत में उपनिवेश के आने तक भारत सांस्कृतिक रूप से समृद्ध था। औपनिवेशिक काल ने हमारी संस्कृति का काफी नुकसान किया है। भारतीय शिक्षा पद्धति को नष्ट किया गया। स्वामी विवेकानन्द की भारतीय शिक्षा पद्धति को आगे बढ़ाने के प्रयास किया था। गुरू-शिष्य परम्परा से ही विवेकानन्द के विचार जीवित रखे जा सकते हैं।

अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के राष्ट्रीय संगठन सचिव डा. बालमुकुंद जी ने कहा कि भारत रत्नगर्भा है। जब भी देश की सनातन संस्कृति कमजोर पड़ती है तो कोई न कोई महापुरुष जन्म लेता है। ऐसे ही महापुरुष विवेकानंद ने सनातन संस्कृति को पूरे विश्व में फैलाया। वे युवाओं के प्रेरणास्रोत थे। वे मानते थे कि जिसके पास समस्या हो वही युवक है। जिसके पास समाधान हो वह वरिष्ठ है। इसलिए युवाओं को जिज्ञासु होना चाहिए। युवाओं में समर्पण की भावना होनी चाहिए। इसके पहले अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह देकर अतिथियों को सम्मानित किया गया।

इनका हुआ सम्मान

विवेकानंद जयंती समारोह में विभिन्न क्षेत्रों में ऊंचाई हासिल करने वालों को अतिथियों ने अंगवस्त्र और भारत माता का चित्र देकर सम्मानित किया। सम्मानित होने वालों में जनार्दन राय, शुभम श्रीवास्तव, शिवांगी श्रीवास्तव, अनुराग सिंह, शिप्रा उपाध्याय, रूपा गुप्ता शामिल रहे। 

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