यूपी : भारतीय जीवन पद्धति प्रकृति की रक्षा के विज्ञान पर आधारित: पटेल

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति प्रकृति की रक्षा के विज्ञान पर आधारित है, जिसे विश्व ने भी माना है। श्रीमती पटेल ने शनिवार को पर्यावरण संरक्षण पर आधारित एक वेबिनार को संबोधित करते हुये कहा कि परिवर्तन प्रकृति का एक शास्वत नियम है। समय एवं आवश्यकताओं की दृष्टि से परिवर्तन होना सृष्टि से सामंजस्य बनाने की महत्वपूर्ण कड़ी है। कालान्तर में जो चीजें आवश्यक थी, वह आज नहीं हैं, इसी प्रकार जो आज है, वह भविष्य में आवश्यक होगा, ऐसा नहीं कहा जा सकता है। उन्होने कहा कि विज्ञान के वरदानों ने मनुष्य को बहुत कुछ दिया है। विज्ञान का प्रभाव मानव की मानसिक शांति, पारिवारिक जीवन एवं सामाजिकता वाले पक्ष पर भी पड़ा है। विज्ञान ने वरदान के साथ प्रदूषण को भी बढ़ा दिया है। पर्यावरण की समस्याएं आज पूरे विश्व के लिये चिन्ता का विषय है। इस समस्या से न केवल मानव जीवन प्रभावित हो रहा है, बल्कि यह पशु-पक्षियों, जीव-जन्तुओं, पेड़-पौधों, वनस्पतियों, वनों, जंगलों, पहाड़ों, नदियों सभी के अस्तित्व के लिये भी घातक सिद्ध हो रही है।

श्रीमती पटेल ने कहा कि अनियोजित विकास एवं मानव की लालची प्रवृत्ति ने जिस प्रकार प्रकृति का शोषण एवं दोहन किया है, उसका परिणाम यह है कि आज पूरी सृष्टि ही खतरे में पड़ गई है। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना ने मानव के समक्ष समस्याएं तो उत्पन्न की हैं लेकिन अपने परिवेश और पर्यावरण के प्रति सचेत भी किया है। राज्यपाल ने कहा कि कोरोना ने सभी को व्यक्तिगत स्वच्छता का महत्व सिखाया है, जो हमारे संस्कारों में गहरे थे, लेकिन हमनें उनकी उपेक्षा करने की चेष्टा की और जिससे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा कि इस महामारी ने वित्तीय नियोजन का भी सबक दिया है कि हमें आपात स्थिति से निपटने के लिए बचत राशि को रखना चाहिए।

उन्होने कहा कि महामारी के परिप्रेक्ष्य में बदलाव लाते हुए शिक्षण, प्रशिक्षण एवं आपसी विचार-विमर्श द्वारा मानवीय मूल्यों को आदर देने, आपसी प्रेम बढ़ाने, सद्भावना व समूह कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने, अच्छे कार्य, अच्छे व्यवहार, अच्छी सेवाएं देने जैसे संसाधन विकसित करें। उन्होंने कहा कि निरन्तर उपयोगी समूह आत्म चिन्तन ही मात्र एक रास्ता है, जो हमें आत्मबोध, दिशाबोध, कार्यबोध और कर्तव्यबोध सहित परस्पर सद्भाव तक पहुंचा सकता है।

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