यूपी : शहीदों के प्रति सामाजिक दायित्व का अहसास कराने को खूब दौड़ी सपना

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मथुरा। देश की रक्षा के लिये अपने प्राणों की आहुति देने वाले शहीदों एवं उनके परिवारों के प्रति सामाजिक दायित्व का बोध कराने के मकसद से मथुरा की एक धावक ने लद्दाख से इण्डिया गेट तक का फासला दौड़ कर पूरा किया है। अंग्रेजी साहित्य से परास्नातक सपना चौहान (25) ने अपने सहयोगियों के साथ 800 किमी की दूरी को 16 दिन में तय किया है। उसकी टीम में चार लोग थे। सपना और सैनिक राकेश चौहान दौड़ लगा रहे थे वहीं पर्वतारोही सुनील सोनेट और पवन टाटा मैजिक में सामान लेकर साथ साथ चल रहे थे। उसने पांच जुलाई को अपना यह अभियान दौड़ते हुए इण्डिया गेट पहुंच कर पूरा किया। अभियान को पूरा करने के बाद अपने गृहनगर मथुरा पहुंची साहसी युवती का सम्मान बालाजीपुरम मोहल्ले में किया गया । सपना ने पत्रकारों से बातचीत में शनिवार को कहा कितनी विषम प्राकृतिक परिस्थिति में सेना के जवान देश की सीमाओं की रक्षा करते हैं इसका अंदाजा सीमाओं पर जाकर ही लगाया जा सकता है। लद्दाख में बरालचा (ले पास )में मुझे अपना अभियान इसलिए रोकना पड़ा कि जहां तक मुझे जाना था, उससे 50 किमी पहले ही परिस्थितियां ऐसी बन गई थीं कि लगता था कि यदि वह और ऊंचाई पर जाएगी तो उसके प्राण ही निकल जाएंगे।


उसका कहना था कि जलवायु की इस विषम परिस्थिति में बिजली के अभाव में उसने जब जवानों को देश की सीमाओं की रक्षा करते हुए देखा तब उसे अनुभव हुआ कि सैनिक देशवासियों के लिए जान हथेली में लेकर किस प्रकार रक्षा करते हैं। परिस्थिति उस समय और खराब हो जाती है जब कोई सैनिक शहीद हो जाता है। धावक ने कहा कि समाज को न केवल शहीदों को अधिकतम सम्मान करना चाहिए बल्कि उसके परिवारजनों की अधिक से अधिक मदद भी करनी चाहिए। सपना ने अपनी मैराथन दौड़ की सफलता का श्रेय सेना से हवलदार के पद से अवकाश प्राप्त अपने पिता इंस्पेक्टर सिंह चौहान को दिया। उन्होंने उसे इस प्रकार के साहसिक कार्य करने की प्रेरणा दीं। उसने बताया िक वह रोज 10 से 15 किलोमीटर दौड़ती है तथा शनिवार या रविवार को 50 किमी तक दौड़ती है।

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