यूपी : राज्य सरकार की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ नीति के कारण उत्तर प्रदेश से निर्यात में 35 फीसदी की बढोतरी

 यूपी : राज्य सरकार की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ नीति के कारण उत्तर प्रदेश से निर्यात में 35 फीसदी की बढोतरी

Newspoint 24 / newsdesk 

नयी दिल्ली।  उत्तर प्रदेश के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने गुरुवार को कहा कि पिछले सवा चार सालों में राज्य की पहचान तेजी से बदली है और उद्योगों के प्रति लचीले रवैये से प्रदेश देश का उद्योग केंद्र बन रहा है।

श्री सिंह ने संवाददाता सम्मेलन को ऑनलाइन संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार की ‘एक जिला, एक उत्पाद’ नीति के कारण उत्तर प्रदेश से निर्यात में 35 फीसदी की बढोतरी हुई है। उन्होंने कहा कि छोटे उद्योगों को राज्य के इतिहास में पहली बार चार सालों में ढाई लाख करोड़ रुपए के ऋण दिए गए हैं, जिससे करीब चार लाख करोड़ का निवेश हुआ है और दो करोड़ 60 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला हैं।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक योजना बनायी गयी है। परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए हर जिला स्तरीय योजना बनायी गयी है।

उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में प्रदेश में आवश्यक वस्तुओं से संबंधित उद्योग और निर्यात वाली इकाइयां संचालित थीं। जबकि दूसरी लहर में आंशिक कोरोना कर्फ्यू लगाया गया था, जिसमें उद्योग धंधे आम दिनों की तरह संचालित थे। उन्होंने कहा कि कोरोना काल में ही नया एमएसएमई कानून 2020 लागू किया गया है। जिसके तहत 72 घंटे में उद्योगों को अनापत्ति प्रमाण दिये जा रहे है और 1000 दिन तक विभिन्न प्रकार के लाइसेंस से छूट दी गई है। कोरोना के दौरान ही 415 इकाइयों को एनओसी दी गई है और वह उद्योग भी संचालित कर रहे हैं।

गांवों में भी औद्योगिकीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रयागराज में प्रायोगिक योजना शुरू की गयी है। इसमें प्रशिक्षण केंद्र के साथ श्रमिकों के रहने की भी व्यवस्था की जा रही है।

उन्होंने कहा कि रोजगार की स्थिति की जानकारी के लिए तीन लाख इकाइयों का सर्वे कराया गया, जिसमें औसतन एक लाख के निवेश पर 3.7 लोगों रोजगार मिला है। ऐसे में एमएसएमई के माध्यम से करीब 2.6 करोड़ लोगों को रोजगार मिले हैं।

राज्य में एमएसएमई के अपर मुख्य सचिव डॉ. नवनीत सहगल ने कहा कि उत्तर प्रदेश के निर्यात में बढ़ोतरी का बहुत बड़ा कारण एक जिला एक उत्पाद योजना है। इसके लिए हर स्तर पर प्रयास किए गए और निर्यात नीति बनाई गई। जिस कारण 2017-18 में प्रदेश का निर्यात 88,967 करोड़ रुपए था, जो 2020-21 में 35 फीसदी बढ़कर 1,21,139 हजार करोड़ हो गया है। उन्होंने कहा कि कोरोना की पहली लहर में 40 लाख प्रवासी श्रमिक आए थे। इनकी स्किल मैपिंग की गई और विभिन्न श्रोतों से रोजगार उपलब्ध कराया गया। जिस कारण दूसरी लहर में मात्र चार लाख ही प्रवासी श्रमिक आए। इससे यह साफ होता है कि बड़ी संख्या में लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार दिलाया गया।

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