आतंकीयों की पैरवी में सामने आये जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द के पदाधिकारी  गतिविधियों को चलाने के लिए लेते हैं डोनेशन

जमीयत-उलेमा-ए-हिन्द

Newspoint 24 / newsdesk 

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आतंकी गतिविधियों में गिरफ्तार हुए दो आतंकी मिनहाज अहमद और मसीरुद्दीन उर्फ मुशीर के पैरवी में सामने आये जमीयत-उलेमा-ए-हिंद संगठन के पदाधिकारी अपनी गतिविधियों को चलाने के लिये बड़े पैमाने पर डोनेशन लेते हैं। संगठन की उत्तर प्रदेश के जिलों में सक्रिय इकाईयों के सदस्यों को डोनेशन लाने की बड़ी जिम्मेदारी है।

नई दिल्ली के एक्सीस बैंक में है खाता

नई दिल्ली के चितरंजन इलाके में एक्सीस बैंक की ब्रांच में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद ने अपना एकाउंट खोल रखा है। संगठन के सक्रिय सदस्य प्रदेश के लोगों से सम्पर्क कर सेवा के नाम पर डोनेशन लेते हैं। पदाधिकारियों की मानें तो डोनेशन की राशि सीधे एकाउंट में ही जाती है। इस संगठन से लोगों को जोड़ने के लिए न्यूनतम सदस्यता शुल्क दस रुपये तय की गयी है। जिससे सामान्य व्यक्ति भी तेजी से संगठन से जुड़ रहे हैं।

इस संगठन के एक पदाधिकारी ने बताया कि डोनेशन की राशि दस रुपये, सौ रुपये, एक हजार रुपये, दस हजार रुपये तय की गई। इससे अधिक चंदा लेने के लिए संगठन के सर्वोच्च पदाधिकारियों की अनुमति लेना आवश्यक है। बताया कि इसके जरिये ही संगठन में नये व्यक्तियों को जोड़ा जाता है।

पदाधिकारी की मानें तो इस संगठन की ओर से गरीब बच्चों की शिक्षा, स्कालरशिप, शिक्षकों के वेतन, हॉस्पिटल, जरुरी स्वास्थ्य संसाधन के नाम पर डोनेशन की राशि ली जाती है। डोनेशन के काम में सक्रिय सदस्यों की मुख्य भूमिका होती है। प्रदेश में 23 जिलों में जमीयत-उलेमा-ए-हिंद की सक्रिय इकाईयां है। प्रत्येक इकाई में पांच से ज्यादा सक्रिय सदस्य होते हैं।

जमीयत-उलेमा-ए-हिंद डोनेशन की राशि से निर्माण कार्य भी कराती है। इसमें मस्जिद, मदरसा, हॉस्पिटल, स्कूल, कुएं, ट्यूबवेल शामिल है। बताया कि मस्जिदों के मरम्मत कार्य बड़े पैमाने पर कराये जाते हैं। मदरसों में किताबों को खरीदने से लेकर आवश्यक वस्तुओं की खरीद भी की जाती है।

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