महर्षि यमदग्नि ऋषि की धरती जौनपुर के जमैथा में कभी खरबूजा होता था आर्थिक समृद्धि का प्रतीक आज बदहाल स्थिति

महर्षि यमदग्नि ऋषि की धरती जौनपुर के जमैथा में कभी खरबूजा होता था आर्थिक समृद्धि का प्रतीक आज बदहाल स्थिति

Newspoint24 / newsdesk 

जौनपुर के जमैथा में कभी खरबूजा होता था आर्थिक समृद्धि का प्रतीक


जौनपुर।  दशकों तक पूर्वांचल में मिठास भरी खुशबू बिखरेने वाला जौनपुर जिले के जमैथा क्षेत्र का खरबूजा आज बदहाल स्थिति में हैं।

जमैथा के खरबूजे का एक स्वर्णिम काल रहा था, जब इस खरबूजे की फसल के दम पर ही किसान अपनी बेटियों के हाथ पीले करने का दम भरते थे। कोई भी मांगलिक कार्यक्रम करना हो अथवा जमीन जायदाद खरीदना हो किसानों का सबसे बड़ा सहारा खरबूजा ही बनता था।

जमैथा में खरबूजे की बदहाल स्थिति पर वहां के किसान बहुत दुखी हैं। खरबूज की खेती करने वाले किसान श्रीपत निषाद, राजबहादुर यादव, नरेंद्र सिंह तथा मोहम्मद रशीद ने बताया कि कभी यह खरबूजे की खेती बहुत फायदे का सौदा होती थी और इसको बोने तथा मंडियों तक पहुंचाने के लिए हम लोग उत्साहित रहते थे, लेकिन समय की मार ऐसी पड़ी कि खरबूजे का तो जैसे अकाल पड़ गया है , न उत्तम किस्म के उन्नत बीज मिलते हैं और न ही सिंचाई सहित अन्य साधन उपलब्ध हो रहे हैं।

इसकी खेती को बढ़ावा देने के लिए किसी प्रकार का सरकारी अनुदान भी उपलब्ध नहीं है जिसकी वजह से इसकी खेती के प्रति किसानों की रुचि धीरे धीरे कम होती गई।

आलम यह है कि जिस खरबूजे की महक से पूरा गांव महकता था और सभी दुकानों पर जमैथा के खरबूजे की अच्छी खासी खपत होती थी, वहीं अब यह यदा-कदा ही किसी दुकान अथवा ठेले पर दिखाई देता है। वास्तव में महर्षि यमदग्नि ऋषि की धरती का यह विशेष फल अब अपना स्थान खो चुका है।
 

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