काशी की गंगा आरती, सुबहे बनारस का नजारा देख बोले जर्मन राजदूत 'अद्भुत शहर'

काशी की गंगा आरती, सुबहे बनारस का नजारा देख बोले जर्मन राजदूत 'अद्भुत शहर'

Newspoint24 /newsdesk /एजेंसी इनपुट के साथ 

जर्मन राजदूत वाल्टर जे लिंडनेर बाबा की नगरी में, दशहरा पर्व का ले रहे आनंद

वाराणसी। भारत में जर्मनी के राजदूत वाल्टर जे लिंडनेर धर्म नगरी काशी में दशहरा पर्व की खुशियां मनाने आये हुए है। सात वार और नौ त्योहार के जीवन दर्शन को जीने वाले वाले नागरिकों की मस्ती और शहर के अलमस्त अड़भंगी अंदाज में जर्मन राजदूत भी रम गये है।

गुरूवार को उन्होंने एक स्थानीय साधु के साथ गंगा की मौजों में नौकायन कर सुबहे बनारस का अद्भुत नजारा देखा। संगीत और फोटोग्राफी के शौकीन राजदूत ने गंगा आरती और घाट का विहंगम अध्यात्मिक नजारा भी देखा। राजदूत ने काशी में फक्कड़ी जीवन दर्शन को देखने के साथ अपनी खुशी का इजहार ट्वीट कर किया है।

उन्होंने नौकायन का आनंद लेने के बाद इसकी तस्वीरों को ट्वीट किया है। राजदूत नाव पर एक साधू के साथ तस्वीर में दिख रहे है। उन्होंने लिखा है काशी में गंगा हिंदुओं द्वारा नदियों के सबसे पवित्र स्थान के रूप में मानी जाती है। नदी के किनारे 90 घाट हैं। यहां गंगा के पानी से जीव शुद्ध होते हैं और मृत्यु को 'मोक्ष' (मृत्यु और पुनर्जन्म से मुक्ति मिलती है) मिलने के लिए जाना जाता है। दशाश्वमेध घाट पर राजदूत ने महादेव के बाल रूप में घूम रहे एक किशोर को देखा तो खुद उसके साथ फोटो खिचंवाई और ट्वीट किया।

इस दौरान उन्होंने घाटों पर मौजूद नाविकों, साधुओं और बच्चों से बातचीत की। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि काशी अद्भुत है। राजदूत ने वाराणसी में रहने वाले बिहार पटना के मूल निवासी साधु बाबा राम से देर तक बातचीत की।

बताते चले, राजदूत ने वाराणसी आने की जानकारी भी ट्वीट कर दी थी। उन्होंने लिखा था कि सबसे प्राचीन शहर बनारस में दशहरा मनाएंगे। राजदूत ने 13 अक्टूबर को ट्वीट किया था कि इस साल दशहरा दिल्ली में नहीं मनाऊंगा। बल्कि, हिंदू धर्म के 7 पवित्र शहरों में से सबसे पवित्र शहर में, पृथ्वी पर सबसे पुराने शहर, तीर्थयात्रा के शानदार केंद्र, रहस्यवाद, मृत्यु के माध्यम से मुक्ति दिलाने वाले वाराणसी में दशहरा मनाऊंगा। हर बार किसी अन्य के विपरीत अनुभव होगा।
 

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