रांची : विश्वविद्यालय ज्ञान के केन्द्र होते हैं, हमारे शिक्षण संस्थान भविष्य को गढ़ते हैं : रमेश बैस

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रांची। झारखंड के राज्यपाल रमेश बैस ने कहा कि बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय, धनबाद के प्रथम दीक्षांत समारोह के आयोजन पर प्रसन्नता है लेकिन ये प्रसन्नता तब और अधिक होती जब संक्रमण की विषम परिस्थितियां नहीं होती और मैं अपने प्यारे छात्र-छात्राओं के मध्य शामिल हो पाता, उनसे मिल सकता। राज्यपाल धनबाद स्थित बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल विश्वविद्यालय के प्रथम दीक्षांत समारोह में वर्चुअल माध्यम से शामिल होकर छात्र-छात्राओं को संबोधित करते हुए कहा कि इस समारोह के दिन विद्यार्थियों के चेहरे पर मुस्कान, उनके उमंग एवं उनके उत्साह का क्षण दीक्षांत समारोह की गरिमा को और बढ़ा देता है। विश्वविद्यालय ज्ञान के केन्द्र होते हैं, हमारे शिक्षण संस्थान भविष्य को गढ़ते हैं। ज्ञान और सूचना तकनीक के विभिन्न आयामों के जरिये ही हम विकास की गति को तीव्र कर सकते हैं।

राज्यपाल ने कहा राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के रूप में हमारा प्रयास होगा कि इस राज्य के अधिक-से-अधिक युवा उच्च शिक्षा ग्रहण करें। ज्ञानार्जन में जाति, धर्म, लिंग बाधक नहीं बनना चाहिये। प्रसन्नता का विषय है कि अब लडकियाँ न केवल उच्च शिक्षा ग्रहण करने के प्रति रूचि रख रही हैं, बल्कि अपनी प्रतिभा से वे उत्कृष्टता भी हासिल कर रही हैं। नारी सशक्तिकरण की दृष्टि से भी यह अहम है। उच्च शिक्षा के विस्तारीकरण हेतु आवश्यकतानुसार नये शिक्षण संस्थान भी स्थापित होने चाहिए। शिक्षा से ही लोगों में जागृति आ सकती है तथा सामाजिक कुरीतियों का पूरी तरह से समाज से अन्त हो सकता है। हमारे शिक्षण संस्थानों की यह कोशिश होनी चाहिए कि विद्यार्थी नैतिकवान एवं चरित्रवान हों। इन अर्थों में देखें तो दीक्षांत समारोह शिक्षा का समापन नहीं, बल्कि आरम्भ है। आज के वैश्विक परिवेश ने युवाओं को अनेक स्वर्णिम अवसर प्रदान किये हैं किन्तु चुनौतियाँ भी कम नहीं है। हमारे विद्यार्थियों को इन चुनौतियों का समाधान करते हुए जीवन में सफलता के शिखर पर चढ़ना है।

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