राजस्थान : आचार संहिता से लम्बा हुआ कैबिनेट विस्तार व राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार


जयपुर। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से 20 जिलों के नगरीय निकायों में चुनाव के ऐलान के साथ ही लागू हुई आचार संहिता ने प्रदेश में कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं का इंतजार लम्बा कर दिया है। राजस्थान कांग्रेस की 31 दिसंबर तक घोषित होने वाली कार्यकारिणी इसी सप्ताह बन सकती है, लेकिन राजनीतिक नियुक्तियां और कैबिनेट एक्सटेंशन के लिए पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को 2 महीने का लम्बा इंतजार करना पड़ सकता है। 

राजस्थान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा यह स्वीकार चुके हैं कि संगठन नहीं होने के चलते पंचायती राज चुनाव में कांग्रेस पार्टी को नुकसान हुआ था। ऐसे में अब 90 निकायों में चुनाव की घोषणा के बाद राजस्थान कांग्रेस की कार्यकारिणी का ऐलान इस सप्ताह कभी भी किया जा सकता है। 30 से 40 नेताओं वाली छोटी प्रदेश कांग्रेस की कार्यकारिणी भले ही इस सप्ताह घोषित कर दी जाए, लेकिन प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी अजय माकन की ओर से तय की गई 31 दिसंबर की डेडलाइन तक राज्य में कांग्रेस पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं की इच्छा पूरी नहीं हो पाई। अब माकन की राजनीतिक नियुक्तियों के लिए दी गई डेडलाइन 31 जनवरी भी आगे खिसकती दिख रही है। क्योंकि, प्रदेश में अब 20 जिलों के 90 नगर निकायों में चुनाव घोषित होने के साथ ही आचार संहिता लग गई है और 28 जनवरी को इन 20 जिलों में मतदान तय किया गया है।

ऐसे में यह पूरा महीना तो आचार संहिता में निकल जाएगा और अगले महीने से प्रदेश में बजट सत्र शुरू हो जाएगा। ऐसे में राजनीतिक नियुक्तियां 31 जनवरी तक होना अब मुमकिन नहीं है। वहीं, कैबिनेट विस्तार भी बजट सत्र के बाद ही होने की संभावना है। ऐसे में जनवरी में अब केवल प्रदेश कांग्रेस कार्यकारिणी की ही घोषणा होगी। बाकी राजनीतिक नियुक्तियां और कैबिनेट फेरबदल या विस्तार का काम अब करीब 2 महीने बाद ही संभव हो सकेगा। इस बात को बल  मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित भोज के दौरान पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट द्वारा दिए गए बयान से मिल रहा है। इसमें उन्होंने कहा था कि नियुक्तियों का काम 2 महीने के अंदर कर लिया जाएगा।

जानकारों के अनुसार इस सप्ताह आने वाली प्रदेश कार्यकारिणी भले ही छोटी होगी, लेकिन इसमें कुछ वर्तमान विधायकों के नाम भी शामिल किए जा रहे हैं। ऐसे में जो विधायक संगठन की जिम्मेदारी संभालेंगे, उन्हें राजनीतिक नियुक्तियों से बाहर रखा जा सकता है। वहीं, छोटी सूची आने से कई उन पूर्व पदाधिकारियों के नाम भी इस बार सूची से हटाए जा सकते हैं, जो हर बार प्रदेश कार्यकारिणी में किसी ना किसी पद पर नियुक्ति पाते रहे हैं।

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