किशोरावस्था से ही महिलाओं को जानकार व कुशल बनायें : आनंदीबेन

Newspoint24.com/newsdesk

वाराणसी। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि आंगनवाड़ी कार्यकत्री सौभाग्यशाली है कि वह माताएं हैं और टीचर भी हैं। बच्चों को जन्म देती हैं और फिर राह दिखाती हैं। शिक्षा के क्षेत्र में महिलाओं की अधिक जरूरत है। शिक्षा में लगभग 60 फ़ीसदी व आंगनवाड़ी में 100 फ़ीसदी महिलाएं काम कर रही हैं। 

चार दिवसीय वाराणसी दौरे पर आई राज्यपाल तीसरे दिन बीएचयू में आयोजित आंगनवाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम को सम्बोधित कर रही थी। "मातृ शिक्षा एवं शिशु की देखभाल" विषय पर प्रशिक्षक की भूमिका में उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शिक्षा में लगभग 60 फ़ीसदी व आंगनवाड़ी में 100 फ़ीसदी महिलाएं काम कर रही हैं। बाल विकास महिला कल्याण विभाग में गांव से लेकर ऊपर तक महिलाओं की श्रृंखला है। राज्यपाल ने कहा कि घर पर 3 वर्ष तक माताएं बच्चों को संस्कार देती हैं। 9 माह गर्भ में रखती है। उसके पूर्व किशोरी होती है। किशोरावस्था से ही महिलाओं को जानकार व कुशल बनाना है। राज्यपाल ने जोर देते हुए कहा कि सभी किशोरियों का हीमोग्लोबिन चेक हो और उन्हें ठीक रखा जाए। गर्भ के दौरान महिलाओं को कैसे रहना है क्या खाना है। प्रसन्न चित्त वातावरण में घर में उन्हें रखें। गर्भ संस्कार क्या है इसका कोर्स कराएं। गर्भस्थ शिशु पर माता की मनः स्थिति, वातावरण, खानपान का प्रभाव पड़ता है। राज्यपाल ने कई उदाहरण भी बताएं। जन्म के बाद बच्चों को कैसे रखें व खान-पान पर बताया। छोटा बच्चा घर में माता-पिता की बातचीत, व्यवहार तथा उसके साथ हो रहे व्यवहार को बहुत नोटिस करता है। जो उसके जीवन व्यवहार में ढलता है। बच्चों को आदर्श कहानी, उत्तम चरित्र की कथाएं बताएं तथा ऐसी पुस्तक के घर में रखें। 

राज्यपाल नेे कहा कि 21वीं सदी के बच्चे बहुत पावरफुल व संवेदनशील हैं। बच्चों में मोबाइल की आदत नहीं डालें। माताएं अपने काम की व्यस्तता में भी बच्चों को मोबाइल देकर नहीं उलझाए, इसका गलत असर पड़ता है। बच्चों के खानपान में तला-भुना जैसा खाद्यान्न से परहेज करें। राज्यपाल आनंदीबेन ने अपने पारिवारिक जीवन में भी उनके द्वारा बाल विवाह का विरोध करने का दृष्टांत भी सुनाया। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने बताया कि वह कानपुर व लखनऊ विश्व​विद्यालय में गर्भ संस्कार का आयोजन करा रही है। स्वस्थ माता, स्वस्थ बच्चे, संस्कारित शिक्षा, शिक्षित नारी पूरे घर परिवार को अच्छे से गढ़ सकती है। इसके लिए स्वयं प्रशिक्षित हो और दूसरों को जागरूक करें। सभी विभाग मिलकर बाल विकास एवं महिला कल्याण के कार्यो के लिए समन्वित रूप से कार्य करें। इससे आदर्श समाज का निर्माण होगा। कार्यक्रम में प्रदेश की मंत्री स्वाति सिंह, विद्या भारती के पदाधिकारी व विभागीय अधिकारी, आंगनवाड़ी कार्यकत्री उपस्थित रही।

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