कानपुर :  मेट्रो ने शुरु किया अंडरग्राउंड निर्माण कार्य, 21 मीटर नीचे चलेगी मेट्रो

कानपुर :  मेट्रो ने शुरु किया अंडरग्राउंड निर्माण कार्य, 21 मीटर नीचे चलेगी मेट्रो

Newspoint24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

 एमडी कुमार केशव ने की पूजा अर्चना, इंजीरियरों ने शुरु किया कार्य

कानपुर। देश में सबसे तेजी से निर्माण कार्य में शुमार हो चुकी कानपुर मेट्रो ने अब अंडरग्राउंड निर्माण कार्य शुरु कर दिया है। यह निर्माण कार्य जमीन के काफी अंदर होगा और कानपुर मेट्रो जमीन क अंदर 21 मीटर नीचे चलेगी। अंडरग्राउंड का पहला स्टेशन परेड स्थित नवीन मार्केट में होगा।

कानपुर में मेट्रो परियोजना का कार्य चल रहा है और पहले चरण के तहत आईआईटी से मोतीझील तक का सिविल कार्य लगभग पूरा हो चुका है। इसके बाद दूसरे चरण के तहत मोतीझील से घंटाघर का निर्माण कार्य भी चल रहा है। इस चरण में नवीन मार्केट के बाद से घंटाघर तक मेट्रो का निर्माण कार्य अंडरग्राउंड होना है। सोमवार को इसकी शुरुआत उस समय हो गई जब यूपी मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (यूपीएमआरसी) के एमडी कुमार केशव ने नवीन मार्केट के पास पूजा अर्चना के बाद नारियल तोड़ा। इसके बाद इंजीनियरों ने भूमिगत मेट्रो का कार्य शुरु कर दिया।

दिसम्बर में टनल बनाने का शुरु होगा काम

चुन्नीगंज से नयागंज चौक चार अंडर ग्राउंड मेट्रो स्टेशनों का निर्माण होना है। दिसम्बर में टनल बनाने वाली टनल बोरिंग मशीन से टनल बनाने का काम शुरू होगा। अभी इस मशीन को जमीन के अंदर ले जाने के लिए रास्ता बनाने की प्रक्रिया की जा रही है। टनल बनाने के पहले मेट्रो स्टेशनों के लिए डायफ्राम वॉल बनाने का काम शुरू हो गया है। मालूम हो कि, अंडरग्राउंड मेट्रो कॉरिडोर तैयार करने का ठेका गुलेरमॉक कंपनी को मिला है।

15 नवम्बर को होगा ट्रायल

पहले चरण के तहत मेट्रो का कार्य लगभग पूरा हो चुका है और यात्रियों से जुड़ी सुविधाओं पर कार्य हो रहा है। यूपी मेट्रो रेल कारपोरेशन के एमडी कुमार केशव ने कहा कि आईआईटी से मोतीझील तक मेट्रो का ट्रायल रन 15 नवम्बर से शुरू हो जाएगा। जनवरी से इसे यात्रियों के लिए खोले जाने की योजना है।

चलता रहेगा ट्रैफिक

कानपुर मेट्रो के अंडरग्राउंड स्टेशनों का निर्माण टॉप डाउन सिस्टम के तहत होगा। अंडरग्राउंड स्टेशनों का कंस्ट्रक्शन ऊपर से नीचे की ओर होगा। इससे ट्रैफिक भी कम प्रभावित होगा। रोड लेवल से शुरू होते ही फर्स्ट फ्लोर उसके बाद जैसे-जैसे काम नीचे पहुंचता जाएगा वैसे वैसे सड़क पर लगी बैरिकेडिंग भी कम होती जाएगी। इससे सड़क के नीचे स्टेशन बनता रहेगा और ऊपर ट्रैफिक भी चलता रहेगा।

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