झारखंड : संतोष पांडेय हत्याकांड मामले में शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के भाई समेत सात को उम्रकैद

Newspoint24.com/newsdesk/ 


बोकारो । घाट व्यवहार न्यायालय ने मंगलवार को राज्य के शिक्षा मंत्री जगरनाथ महतो के भाई बैजनाथ महतो, गणेश भारती, नेमी पुरी, कैलाश पुरी, जितेंद्र पुरी, नीरज पुरी एवं केवल महतो को उम्रकैद की सजा सुनाई है। मामला बोकारो जिले के नावाडीह थाना क्षेत्र के चर्चित संतोष पांडेय हत्याकांड का है। इस मामले में तीन अन्य अभियुक्तों सत्येन्द्र गिरी, मेहलाल पुरी एवं सूरज पुरी को साक्ष्य के अभाव में रिहा कर दिया गया है। 

गौरतलब है कि अलारगो गांव निवासी संतोष की हत्या 20 मार्च 2014 को हत्या कर दी गयी थी। इस बाबत संतोष के बड़े भाई अनंत लाल पांडेय की शिकायत पर नावाडीह थाने में मामला दर्ज किया गया था। एफआईआर में कहा गया था कि उसके छोटे भाई संतोष पांडेय को तत्कालीन डुमरी विधायक जगरनाथ महतो ने अपने आवास के सामने जनता दरबार लगाकर पीटने का आदेश दिया था। फिर विधायक के भाई बैजनाथ महतो की अगुवाई में उसके भाई को  पीटा गया था। पिटाई से बेहोश हुए भाई को डीवीसी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसकी मौत हो गई। संतोष को मौत की यह सजा प्यार करने के जुर्म में दी गयी थी।

जिस लड़की से उसने प्रेम किया था उसे कुछ दिन पहले तक ट्यूशन पढ़ाया करता था। वह भंडारीदह के आदिवासी शिशु मंदिर में शिक्षक के रूप में काम करता था। उसे लगा कि यहां उसके प्रेम को स्वीकार नहीं किया जायेगा तो वह प्रेमिका के साथ उसके कहने पर ही चेन्नई चला गया था। इसकी जानकारी गांव पहुंची तो कई लोग चेन्नई पहुंचे और उन दोनों को लेकर गांव आये। रास्ते में भी संतोष को बुरी तरह प्रताड़ित किया गया। गांव पहुंचने के पहले ही लड़की को ट्रेन से उतारकर किसी रिश्तेदार के घर भेज दिया गया और संतोष को गांव में लगी अदालत में पेश किया गया, जहां उसे बेरहमी से पीटा गया। इस मामले में 4 जनवरी को अदालत ने सात लोगों को दोषी करार दिया था। 

इससे पहले अभियोजन पक्ष की ओर से 34 गवाहों का बयान न्यायालय में दर्ज किया गया। अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक संजय कुमार सिंह और बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता सत्यनारायण डे, कुमार अनंत मोहन सिन्हा एवं अरुण कुमार सिन्हा थे। सजा पाये सभी सातों अभियुक्तों में से एक अभियुक्त बैजनाथ महतो पूर्व से जेल में बंद हैं। अन्य छह को दोषी पाने के बाद हिरासत में लेकर तेनुघाट जेल भेज दिया गया था। कोरोना काल में भी इस मामले की बहस लगातार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर जारी रही। इस मामले में जगरनाथ महतो को भी तब इस मामले में आरोपी बनाया गया था, लेकिन घटना के तत्काल बाद एसआईटी जांच में उनके खिलाफ कोई साक्ष्य नहीं मिला। उन्हें इस मामले से क्लीनचीट दे दिया गया। जांच के बाद दस अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई लगभग सात वर्षों में पूरी हुई।

उधर, लड़की के भाई ने अपनी बहन के अपहरण का मामला संतोष पांडेय के विरुद्ध नावाडीह पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज कराया था। संतोष पांडेय पर युवती को अगवा कर ले जाने का आरोप था। आरोपी की मौत हो जाने के बाद यह मामला समाप्त कर दिया गया। युवती की बरामदगी के बाद न्यायालय में बयान दर्ज कराया गया था।


 

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