अमरोहा में महिला अपराध की बढ़ती घटनायें चिंता का सबब

Newspoint24.com/newsdesk

अमरोहा । उत्तर प्रदेश के अमरोहा में आपराधिक वारदातों पर अंकुश लगने के बजाय दिनोंदिन होती बढोत्तरी पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवालिया निशान लगा रही है।
पिछली तीन दिसंबर को औरैया से स्थानांतरित होकर आयी पुलिस अधीक्षक सुनीति ने भरोसा दिलाया था कि अपराध नियंत्रण, महिला सुरक्षा और भ्रष्टाचार का खात्मा उनकी प्राथमिकता रहेगी। बावजूद इसके अमरोहा में महिलाओं पर अत्याचार बढ रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक मामले दहेज उत्पीड़न, छेड़खानी के हैं। यहां दो बहनों की हत्या कर दी गई, तो एक को दहेज के लिए मौत के घाट उतार दिया गया। तीन बेटियों के अपहरण हुए है, जिनका अभी तक कोई सुराग नहीं लगा है।
पुलिस दावा करती है कि वह अपराधियों पर अंकुश लगा रही है लेकिन, आंकड़े बताते है कि लगाम लग नहीं रहा है। घरेलू विवादों के सुलह-समझौते के लिए नारी उत्थान केंद्र भी खोला हुआ है। पुलिस तक पहुंचने वाले घरेलू विवादों को नारी उत्थान केंद्र भेजा जाता है जिससे दोनों परिवारों को समझाकर समझौता कराया जा सके और घर टूटने से बचाया जा सके।
इतना ही नहीं अमरोहा पुलिस ने जिस मामले को ऑनर किलिंग बताया था वो फर्जी निकला। जिला न्यायाधीश सुरेंद्र सिंह की जिला अदालत ने पहली अप्रैल को दिए महत्वपूर्ण फैसले में लडकी के पिता सुरेश, भाई रूपकिशोर तथा रिश्तेदार देवेंद्र को बेगुनाह बताते हुए उन्हें दोषमुक्त करार देते हुए जेल में बंद देवेंद्र की रिहाई के आदेश दिए हैं वहीं थाना आदमपुर के विवेचक दारोगा अशोक शर्मा के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही के लिए उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन और पुलिस अधीक्षक अमरोहा को आदेश जारी किए हैं।
दरअसल, अमरोहा पुलिस ने जिस लड़की की ऑनर किलिंग में उसके बाप और भाई को जेल भेज दिया था वो जिंदा मिली है और खुद के जिंदा होने का सुबूत देने पुलिस के पास पहुंच गई। इस घटना के बाद अमरोहा पुलिस की भारी किरकिरी हुई थी। इस तरह की घटनाएं पुलिस की भयंकर लापरवाही का प्रमाण देती है। सवाल यह है कि अगर ये लड़की न मिलती तो निर्दोष बाप-बेटों की जिंदगी बर्बाद होने का जिम्मेदार कौन होता।
यह मामला दो साल पहले का है। इसमें लड़की अपने प्रेमी के साथ चली गई थी फिर वापस आई थी। 6 फरवरी 2019 इस लड़की की गुमशुदगी अमरोहा के आदमपुर थाने में लिखी गई थी। 18 फरवरी 2019 को अपनी पीठ खुद थपथपाते हुए तत्कालीन अमरोहा पुलिस अधीक्षक ने इस घटना का खुलासा किया था और हत्या में उपयोग किए गए तमंचा कारतूस और खून में सने हुए कपड़े भी बरामद दिखाएं थे। ये लोग तब से जेल में बंद रहे और बेबसी और बेगुनाही की सजा भुगतते रहे हैं।
हालांकि कुछ समय पहले बाप-बेटा जमानत पर छूट कर घर आए जरूर लेकिन उनका एक रिश्तेदार देवेंद्र की रिहाई के आदेश पहली अप्रैल को जिला जज की अदालत से फैसला आने से पहले तक वह बेगुनाह जेल में ही बंद था।
जिले में मलकपुर गांव के रहने वाले पीड़ित परिवार के राहुल ने बताया है कि पुलिस ने लड़की के पिता सुरेश, उसके भाई रूप किशोर और पड़ोस के गांव के रहने वाले देवेंद्र सहित तीन लोगों को आरोपी बनाकर जेल भेज दिया था। जबकि परिजन जानते थे कि लड़की जिंदा है। पुलिस ने मारपीट कर इकबालिया बयान दिलवाया था।स्वजन तब से ही लड़की को तलाशने के प्रयास में जुटे थे।काफी मशक्कत के बाद उसे पोरारा गांव के राकेश के घर तलाश लिया है। अब वह लड़की एक बच्चे की मां भी है।इससे अधिक पीड़ादायक अब क्या हो सकता है।
समाजवादी पार्टी के अतुल प्रधान कहते हैं, “उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था अब तक कि सबसे खराब कानून व्यवस्था है, पुलिस पीटकर गुनाह कबूल करवाकर बेगुनाहों को जेल भेज रही है। अमरोहा की घटना का सच सामने आ गया है ऐसी बहुत सी घटनाओं की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले नतीजे सामने आ सकते हैं।
इस मामले में हालांकि थाना इंचार्ज अशोक शर्मा को निलंबित कर दिया गया। अक्सर जनहित के मामलों में मुखर रहने वाले एडवोकेट गजेंद्र सिंह के अनुसार जांच अधिकारी की गलती स्पष्ट दिखाई देती है। एक बेगुनाह के जेल में होने की पीड़ा को बयां नही किया जा सकता है। हत्या जैसे मामलों में किसी की पूरी जिंदगी दांव पर लग जाती है।

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