उप्र में गाय की देशी नस्ल शाहीवाल की तरफ फिर बढ़ा गौ पालकों का रुझान

Newspoint24 / newsdesk

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश में देशी गायों की नस्लों के रखरखाव और उनके पालन-पोषण के प्रति रुझान बढ़ रहा है। गौ पालक फिर से विदेशी नस्लों को छोड़कर गाय की देशी नस्ल शाहीवाल को पसंद कर रहे हैं। अधिक पौष्टिक दूध मिलने के कारण दूध के उत्पादन में भी लगातार वृद्धि हो रही है।

जानकारों का कहना है कि शाहीवाल नस्ल दो से तीन हजार लीटर तक सालाना दूध देती है। इसकी वजह से दुग्ध व्यवसायी इन्हें काफी पसंद करते हैं। इतना ही नहीं यह गाय एक बार मां बनने पर करीब 10 महीने तक दूध देती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की देशी गायों के प्रति रुचि और उनके संरक्षण व संवर्धन की पहल से भी लोगों में गायों के प्रति लगाव बढ़ा है।

राज्य सरकार के एक प्रवक्ता का कहना है कि दुग्ध संघ लखनऊ इस मामले में बड़ी भूमिका निभा रहा है। उसने किसानों को दुग्ध समितियों से जोड़कर दूध विक्रय बाजार उपलब्ध कराए हैं। करीब 3000 से अधिक देशी गायों से प्रतिदिन औसतन 4500 लीटर दूध का उत्पादन किया जा रहा है। इनमें शाहीवाल नस्ल की गायों की संख्या 70 प्रतिशत से अधिक है।

प्रवक्ता ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार भी दिये जा रहे हैं। अकेले लखनऊ मण्डल में 2 साल में 31 किसानों को नन्दबाबा पुरस्कार से पुरस्कृत किया गया है। दुग्ध संघ लखनऊ में मण्डल स्तर पर हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर, उन्नाव, रायबरेली और लखनऊ में देशी गाय का पालन-पोषण करने वाले किसानों में इजाफा हुआ है।

भारतीय गोवंश को बचाने वालों को नन्दबाबा पुरस्कार से नवाज रही सरकार

सरकारी प्रवक्ता के अनुसार दो सालों में देशी गाय के सर्वाधिक दूध देने वाले उत्पादक सदस्यों को नन्दबाबा पुरस्कार योजना का लाभ मिला है। वर्ष 2018-19 में 6 जनपद में 6 किसानों को जनपद स्तरीय पुरस्कार और 7 किसानों को विकास खंड स्तरीय पुरस्कार दिये हैं, जबकि वर्ष 2019-20 के 6 जनपदों में 6 किसानों को और विकास खंड स्तर पर 12 लाभाथियों को पुरस्कृत करने का कार्य चल रहा है। नन्दबाबा पुरस्कार योजना से देशी गाय के सर्वाधिक दूध देने वाले उत्पादक सदस्य को जिला स्तर पर 21000 रुपये, विकास खंड स्तर पर प्रथम आने पर 5100 रुपये व पीतल धातु की नन्द बाबा एवं गाय की प्रतिमा प्रदान की जाती है।

‘समिति कल्याण कोष’ बना दुग्ध किसानों के लिए ‘संजीवनी’

राज्य सरकार की मंशा के अनुसार दुग्ध संघ लखनऊ स्तर पर समिति कल्याण कोष का गठन किया गया है, जो दुग्ध उत्पादक सदस्यों को वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है। वर्ष 2019 से आज तक इस कोष से 15 लाभार्थियों को लाभ दिया गया है। इस योजना से गाय पालकों की आकस्मिक दुर्घटना मृत्यु होने की दशा में 35000 रुपये वित्तीय सहायता दी जा रही है। स्थायी अपंगता की दशा में 17500 रुपये, आंशिक अपंगता की दशा में 15000 रुपये, सामान्य मृत्यु पर 7500 रुपये, हाथ पैर टूटने पर उपचार के लिए 7000 रुपये, कैंसर आदि गंभीर बीमारी पर 30000 रुपये, रीढ़ की हड्डी टूटने पर 15000 रुपये, दुर्घटना में उपचार के लिए 5000 रुपये और किसी प्रकार का ऑपरेशन कराए जाने पर 5000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जा रही है। इतना ही नहीं आकस्मिक दुर्घटना की दशा में यदि सदस्य कोमा की स्थिति में है तो 20000 रुपये और यदि मृत्यु हो जाती है तो अतिरिक्त 15000 रुपये दिए जा रहे हैं। इस प्रकार कुल 35000 रुपये की सहायता धनराशि दुग्ध संघ द्वारा समिति के दुग्ध उत्पादक सदस्य को भुगतान किया जाता है।

हिन्दुस्थान समाचार

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