बदलते मौसम में फसलों पर बढ़ सकता है माहो का प्रकोप, करें दवा का छिड़काव

newspoint24.com/newsdesk

लखनऊ । बदलते मौसम में रबी की फसलों का बचाव करना जरूरी है, वरना फंफूद माहो का प्रकोप सब्जियों, सरसों अरहर, चना व मटर की खेती को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसे मौसम में किसान माहो के लिए देसी दवा नीम के तेल का भी प्रयोग कर सकते हैं। इससे माहो का प्रभाव कम हो जाता है।

इस संबंध में सीमैप के कृषि वैज्ञानिक डाक्टर राजेश वर्मा का कहना है कि माहो या फंगस के लिए बाजार में बहुत दवाएं उपलब्ध हैं। किसानों को बदलते मौसम में सजग रहना चाहिए। जैसे ही रोग के लक्षण दिखे, दवा का छिड़काव करना चाहिए, वरना फसल खराब हो सकती है। इससे काफी नुकसान हो जाएगा। उन्होंने कहा कि माहो के लिए खेत के पास धुआं भी किया जाता है। हाइड्रोसाल आयल का भी स्प्रे किया जा सकता है। मटर में डाइथेन एम-45 का प्रयोग किया जा सकता है।

वहीं प्रगतिशील किसान दिवाकर राय का कहना है कि माहो के लिए सोठास्त्र का प्रयोग करने से भी माहो का प्रकोप खत्म हो जाता है। इसके लिए सोठ को 200 ग्राम दो लीटर पानी में उबालने रख दें। आधा पानी बचने पर देसी गाय का पांच लीटर दूध गर्म करके मलाई निकाल लें। सोंठ काढ़ा और उबले दूध को मिलाकर 200 लीटर पानी में घोलकर एक एकड़ खेत में छिड़काव करने से माहू कीट से निजात मिल जायेगी।

उद्यान विभाग के उप निदेशक अनीस श्रीवास्तव का कहना है कि रबी की फसलों में लगने वाला 'माहू कीट' दिसंबर से फरवरी तक ज्यादा प्रभाव डालता है। यदि किसान इसके प्रति सजग न रहें तो इससे पैदावार पर ज्यादा असर पड़ जाता है। इसके लिए तमाम तरह की दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं। इसके साथ ही नीम का तेल भी काफी असरकारक है।

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