हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में वाराणसी कोर्ट चल रहे वाद की अगली प्रकिया पर रोक लगाई 

Allahabad High Court

newspoint 24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

हाईकोर्ट के रोक से नहीं होगा ए एस आई सर्वेक्षण

प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने काशी विश्वनाथ मंदिर व ज्ञानवापी मस्जिद विवाद को लेकर वाराणसी सिविल कोर्ट में मंदिर की ओर से दाखिल वाद में अगली प्रकिया पर आज रोक लगा दी।

हाईकोर्ट के इस आदेश से निचली अदालत द्वारा 08 अप्रैल को पारित उस आदेश पर अब रोक लग गई, जिसके द्वारा मंदिर परिसर में ए एस आई से सर्वेक्षण कराने का निर्देश दिया गया था। पहले सिविल कोर्ट ने मस्जिद परिसर की जांच के लिए एएसआई सर्वेक्षण का आदेश पारित किया था।

यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने यूपी सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी की ओर से सर्वेक्षण पर रोक लगाए जाने की मांग में दाखिल याचिका पर पारित किया है। हाईकोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर अंतरिम आदेश पारित करते हुए भारत सरकार, प्रदेश सरकार व काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट से तीन सप्ताह में जवाब माँगा है। कोर्ट इन याचिकाओं पर अब 08 अक्टूबर 2021 को अंतिम रूप से सुनवाई करेगी।

बहुचर्चित काशी विश्वनाथ मंदिर-मस्जिद विवाद को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई के बाद कोर्ट ने निर्णय सुरक्षित कर लिया था। कोर्ट ने अपने आदेश में वाराणसी की निचली अदालत द्वारा पारित आदेश पर गम्भीर टिप्पणी भी की है और इस आदेश को न्यायिक परम्परा के खिलाफ माना है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में मंदिर ट्रस्ट की तरफ से दाखिल वाद की अगली प्रकिया पर पहले भी रोक लगा रखी थी। परन्तु सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के बाद कि किसी भी कोर्ट में पारित अंतरिम आदेश 6 माह पश्चात समाप्त माना जाएगा, इस प्रकार के निर्णय को आधार बनाकर निचली अदालत ने वाद में सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दिया था तथा ए एस आई सर्वेक्षण का आदेश दिया था। जिसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।

याचिका के अनुसार पूजा अधिकार कानून-1991 आने के बाद काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट ने वाराणसी की सिविल कोर्ट में वक्फ मस्जिद शाही आलमगिरी को मंदिर की जमीन से हटाकर पूरी जमीन का कब्जा सौंपने की मांग में मुकदमा दायर किया।

मस्जिद की तरफ से मुकदमे की ग्राह्यता पर आपत्ति की गई है। सिविल कोर्ट ने वाद बिन्दु बनाते हुए पक्ष रखने को कहा था। इसके खिलाफ पुनरीक्षण याचिका पर निचली कोर्ट ने आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए कहा था कि साक्ष्य लेने के बाद प्रारम्भिक आपत्ति का निस्तारण होगा। इन दोनों आदेशों को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड ने पक्षकार बनाने की अर्जी दी। उसे निरस्त कर दिया गया है। उसे भी चुनौती दी गई है।

याची का कहना है कि पूजा अधिकार कानून लागू होने के बाद सिविल वाद पोषणीय नहीं है। इसलिए मुकदमा खारिज किया जाए। मंदिर की तरफ से कहा गया कि पूरी जमीन मंदिर की है। चारों तरफ मूर्तियों की पूजा होती है। औरंगजेब ने मंदिर तुडवाकर मलबे से मस्जिद बनवाया है। मंदिर से अवैध निर्माण हटाया जाए और मंदिर की स्थिति बहाल की जाए।

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