गेहूं की मंडियों में फैली अव्यवस्था के लिए सरकार जिम्मेदार: हुड्डा

Newspoint24.com/newsdesk

चंडीगढ़ । हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री एवं प्रतिपक्ष के नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की मंडियों में फैली अव्यवस्था के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

उन्होंने आज यहां कहा कि एक अप्रैल से गेहूं खरीद का ऐलान करने के बावजूद सरकार ने मंडियों में गेहूं खरीद के लिए उचित व्यवस्था नहीं की। जो किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं उन्हें वेब पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन और सर्वर डाउन का बहाना बनाकर परेशान किया जा रहा है। किसानों को कहा जा रहा है कि जिसके पास मैसेज आएगा, उसे ही अपनी फसल मंडी में बेचने के लिए आना है।

उन्होंने कहा कि जिन किसानों की गेहूं कट चुकी है और उनको मैसेज नहीं आया तो वो अपनी गेहूं लेकर कहां जाएगा। किसान फसल काटने के बाद उसे पहले अपने घर और फिर मैसेज आने के बाद मंडी में लेकर जाएगा तो इससे उसकी लेबर और ट्रांसपोर्ट की लागत डबल हो जाएगी। सरकार को चाहिए कि जो किसान अपनी फसल लेकर मंडी में पहुंच रहे हैं, फौरन उसकी खरीद करे।

श्री हुड्डा ने कहा कि किसानों को फसल का एमएसपी न देना पड़े, इसलिए सरकार ने नमी की मान्य मात्रा को घटाने का फैसला लिया है। अब मंडियों वहीं गेहूं खरीदा जाएगा, जिसमें नमी 12 प्रतिशत से कम होगी। पहले 14 प्रतिशत तक नमी वाले गेहूं की भी खरीद होती थी। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ेगा। इसलिए सरकार को तुरंत इस फैसले को वापिस लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वैसे तो हर क्षेत्र में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन शिक्षा का क्षेत्र इससे खास तौर पर प्रभावित है। सरकारी स्कूलों में टीचर्स के करीब 45 हजार पद खाली पड़े हुए हैं। यहां तक कि स्कूलों में हेड मास्टर और प्रिंसिपल के भी करीब 50 प्रतिशत पद खाली पड़े हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक खुद मुख्यमंत्री के जिले करनाल में 54 प्रतिशत स्कूलों में हेड टीचर नहीं है। बावजूद इसके सरकार नई भर्तियां नहीं कर रही। करीब एक लाख एचटेट पास जेबीटी 7 साल से भर्ती का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश की बीजेपी सरकार ने अपने पूरे कार्यकाल में आज तक एक भी भर्ती नहीं निकाली। कांग्रेस कार्यकाल में 20 हजार से ज्यादा जेबीटी की भर्ती हुई। स्पष्ट है कि सरकार शिक्षा को पूरी तरह निजी हाथों में सौंपने का मन बना चुकी है।
 

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