मां चंद्रघंटा की पूजा करने वाले भक्तों को यश, कीर्ति और सम्मान मिलता है

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Newspoint24 / newsdesk

सीवान। जिला मुख्यालय के गांधी मैदान स्थित बढ़िया माई मंदिर, फतेहपुर दुर्गा मंदिर , कचहरी दुर्गा मंदिर सहित जिले के सभी प्रमुख मंदिरों एवं घरों में नवरात्रि के तीसरे दिन दुर्गा मां के चंद्रघंटा रूप की पूजा की गई।

उल्लेखनीय हो कि मां का तीसरा रूप राक्षसों का वध करने के लिए जाना जाता रहा है। वैसे मान्यता है कि वह अपने भक्तों के दुखों को दूर करती हैं, इसलिए उनके हाथों में तलवार, त्रिशूल, गदा और धनुष रहता है हमेशा। साथ ही ये भी माना गया है कि मां चंद्रघंटा को घंटों की नाद बेहद प्रिय रही है। वे इससे दुष्टों का संहार तो करती हैं, वहीं इनकी पूजा में घंटा बजाने का खास महत्व रहता है।

धार्मिक कर्मकांड के जाने-माने विद्वान पंडित मनोज शास्त्री ने कहा कि माना जाता है कि मां चंद्रघंटा की उत्पत्ति ही धर्म की रक्षा और संसार से अंधकार मिटाने के लिए हुई थी। धार्मिक मान्यता है कि मां चंद्रघंटा की उपासना भक्त को आध्यात्मिक और आत्मिक शक्ति प्रदान करती है। नवरात्रि के तीसरे दिन माता चंद्रघंटा की साधना कर दुर्गा सप्तशती का पाठ करने वाले भक्तों को संसार में यश, कीर्ति और सम्मान मिलता है ऐसी मान्याता है।

उन्होंने कहा कि मां चंद्रघंटा के मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है, इसी कारण से इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है। इनके शरीर का रंग स्वर्ण के समान चमकीला है। इनके दस हाथ हैं। इनके दसों हाथों में खड्ग आदि शस्त्र तथा बाण आदि अस्त्र विभूषित हैं। इनका वाहन सिंह है। अपने वाहन सिंह पर सवार मां का यह स्वरुप युद्ध व दुष्टों का नाश करने के लिए तत्पर रहता है।

हिन्दुस्थान समाचार

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