डिनर डिप्लोमेसी के बहाने सीएम गहलोत ने टटोला असंतुष्टों का मन

Newspoint24.com/newsdesk/ 


जयपुर । राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार शाम अपने निवास पर डिनर डिप्लोमेसी के बहाने असंतुष्ट विधायकों का मन साधा। इससे पहले मुख्यमंत्री गहलोत ने अपने निवास पर ही कांग्रेस तथा कांग्रेस समर्थित विधायकों की बैठक ली। बैठक में मुख्य रूप से किसानों को दिन में बिजली देने, बिजली के लिए वीसीआर की अनिवार्यता खत्म करने, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों, विधायक कोष पर लगी रोक हटाने तथा नई भर्ती करने समेत कोरोना और अन्य कई मुद्दों पर चर्चा की गई।

प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने रविवार को जयपुर के शहीद स्मारक पर किसान आंदोलन तथा राजभवन में रोके जा रहे संशोधित कृषि बिलों के समर्थन में चार घंटे धरना देने का आह्वान किया था। इसके साथ ही मुख्यमंत्री गहलोत ने रविवार शाम अपने निवास पर कांग्रेस तथा समर्थित विधायकों की बैठक तथा डिनर का ऐलान किया था। रविवार शाम 4 बजे शहीद स्मारक पर धरना खत्म होने के बाद कांग्रेस व समर्थित विधायक विसर्जित हो गए, जो शाम 7 बजे सीएमआर पर जुटने लगे। यहां मुख्यमंत्री गहलोत व पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा, महेश जोशी, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट की मौजूदगी में कांग्रेस व समर्थित विधायकों की बैठक हुई। बैठक में मुख्य रूप से किसानों को दिन में बिजली देने के मसले पर चर्चा की गई। इस दौरान मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली देने के लिए शुरुआती चरण में 15 जिलों को चिह्नित किया गया है। इसके बाद अन्य जिलों में भी किसानों को सिंचाई के लिए दिन में बिजली दी जाएगी। इस दौरान विधायकों ने बिजली के लिए वीसीआर की अनिवार्यता खत्म करने, थर्ड ग्रेड शिक्षकों के तबादलों, विधायक कोष पर लगी रोक हटाने तथा नई भर्ती करने समेत कोरोना और अन्य कई मुद्दों पर चर्चा की और अपने सुझाव दिए।

रविवार को दूसरा मौका रहा, जब पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के साथ उनके निवास पर दूसरी बार मंच शेयर किया। पहली बार वे शहीद स्मारक पर कांग्रेस की ओर से दिए गए धरने पर मुख्यमंत्री गहलोत के बांई तरफ बैठे, जबकि मुख्यमंत्री निवास पर आयोजित विधायकों की बैठक में भी उन्होंने गहलोत के साथ मंच साझा किया। बैठक के बाद मुख्यमंत्री निवास पर कांग्रेस व समर्थित विधायकों को डिनर दिया गया। सियासी हलकों में मुख्यमंत्री की ओर से दिए गए डिनर की काफी चर्चा रही। विपक्ष ने जहां इस पर कटाक्ष किए, वहीं राजनीतिक पंडितों ने इसे अंसतुष्टों को साधने की कवायद बताया।

Share this story