चित्रकूट: कर्वी ब्लाक में मनरेगा के तहत 50 लाख का घोटाला

Newspoint24.com/newsdesk

चित्रकूट। हद हो गई। मनरेगा के तहत एक ओर तो श्रमिकों और गरीबों को काम देने का दावा किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर इसकी जिम्मेदारी जिनको मिली है, वे अपना उल्लू सीधा कर रहे हैं। इसी तरह का एक मामला कर्वी ब्लाक में सामने आया है, जहां एक नहीं बल्कि दस गांवों में घोटाला हुआ और पचास लाख की अनियमितता पाई गई है। मामला कर्वी ब्लॉक के रगौलीदुवारीरसिनभगतपुरभैसौंधाअमिलिहाशिवरामपुरपहरा गांवों का है। प्रथमदृष्टया इस घोटाले में ग्राम प्रधानसचिव  व जेई लिप्त पाए गए हैं। 

शुक्रवार को डीसी मनरेगा दयाराम यादव ने बताया कि जांच में पाया गया कि कर्वी ब्लाक के 10 ग्राम पंचायतों में मनरेगा के तहत एक भी काम नहीं हुआ है और इसकी धनराशि बिना काम किए निकाल ली गई और मौके पर जब पांच सदस्यीय जांच टीम ने देखा तो किसी भी तरह का काम नहीं पाया गया। इस मामले में सबसे ज्यादा 15 लाख का गबन का आरोप जेई आरईडी यजुवेंद्र यादव  पर है। 22 लाख का गबन ग्राम प्रधानों द्वारा व 15 लाख का गबन ग्राम पंचायत/ग्राम विकास अधिकारियों ने किया। 

उन्होंने बताया कि सभी लोगो को नोटिस जारी करते हुए सात दिन के अंदर पैसा वापस करने के लिए पत्र भेजा गया है। आरोप है कि सचिव मान सिंह ने 3 लाखश्याम सिंह ने 3 लाखरामनारायण पांडेय ने 5 लाख व शिवम सिंह ने 4 लाख रुपये का गबन किया गया है। ग्राम प्रधान रगौली ने 3 लाख ,दुआरी ने 3 लाखरसिन ने 2 लाख, भगतपुर ने 2 लाखभैसौंधा ने 90 हजारअमिलिया ने 2 लाख, शिवरामपुर ने 2 लाख ,व ग्राम प्रधान पहरा ने 2 लाख का घोटाला किया है। इन सब पर सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है। मनरेगा के तहत जो विकास कार्य होने चाहिए थे वो धरातल पर कही नज़र नही आये।

उन्होंने यह भी कहा कि यदि 7 दिन के अंदर पैसा वापस नहीं करते हैं तो निलंबन की कार्रवाई करते हुए एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।इनको जेल भी भेजा जाना चाहिए- अनुजसपा जिलाध्यक्ष अनुज सिंह यादव ने आरोप लगाया कि एक तरफ तो सरकार मनरेगा में गरीबों को काम देने का ढिंढोरा पीटती है, दूसरी ओर इस तरह के घोटाले किए जाते हैं। इन सभी दोषियों पर मुकदमा चलाया जाना चाहिए और जेल भेजा जाना चाहिए। सिर्फ पैसा वापस करा लेना कोई दंड नहीं।  

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