कोरोना पर ज्योतिषीय चिंतन 21 नवम्बर 2021 के बाद महामारी का असर समाप्ति की ओर होगा

Newspoint24 /newsdesk Astrological contemplation on Corona After 21 November 2021, the effect of the epidemic will be towards its end

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हरिद्वार। मानवाधिकार संरक्षण समिति एवं उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय हरिद्वार ने सोमवार को संयुक्त तत्वावधान में कोरोना में ज्योतिषीय चिंतन विषय पर वेबिनार का आयोजन किया। इसकी अध्यक्षता इं. मधुसूदन आर्य ने की। विशिष्ट अतिथि उत्तराखंड संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. देवी प्रसाद त्रिपाठी ने कहा कि कोरोना ने मानव जाति को झकझोर कर रख दिया है। वैज्ञानिक पूर्वानुमान लगा रहे हैं कि तीसरी लहर आएगी। ज्योतिष शास्त्र में पूर्ण ज्ञान न होने के कारण लोगों के बीच  भ्रम फैलाया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि पंचांगों में महामारी का स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है, लेकिन लोग उसको गम्भीरता से नहीं लेते हैं। बृहत संहिता में वर्णन है कि जिस वर्ष के राजा शनि होते हैं उस वर्ष में महामारी फैलती है। विशिष्ट संहिता अनुसार पूर्वा भाद्र नक्षत्र में जब कोई महामारी फैलती है तो उसका इलाज मुश्किल हो जाता है। उन्होंने कहा 21 नवम्बर 2021 के बाद इसका असर समाप्ति की ओर होगा।


इं. मधुसूदन आर्य ने वेबिनार की अध्यक्षता करते हुए कहा कि ज्योतिषीय पक्ष से वर्तमान स्थितियों की गणना करें तो इन हालातों के लिए ग्रहों की परिस्थितियां भी जिम्मेदार हैं। मुख्य वक्ता प्रो. प्रेम कुमार शर्मा, संकाय अध्यक्ष, वेद वेदांग संकाय, लाल बहादुर शास्त्री केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय दिल्ली ने कहा कि न्यायाधीश शनि जब भी अपनी स्वराशि या सूर्य के उत्तराषाढा नक्षत्र में आते हैं, तो हाहाकार मचा देते हैं। संसार को बैलेंस में रखने की जवाबदारी शनि, राहु व केतु इन्हीं तीनों ग्रहों के पास है। आपदा एक प्राकृतिक या मानव निर्मित जोखिम का प्रभाव है जो समाज या पर्यावरण को नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है। आपदा शब्द ज्योतिष विज्ञान से आया है। इसका अर्थ होता है कि जब तारे बुरी स्थिति में होते हैं तब बुरी घटनायें होती हैं। 


उत्तराखंडमुक्त विश्वविद्यालय हल्द्वानी के डा. नन्दन तिवारी, डाॅ. प्रभाकर पुरोहित, उत्तराखंडसंस्कृत विश्वविद्यालय के कुलसचिव डा. गिरिश कुमार अवस्थी ने भी अपने विचार व्यक्त किए। 


इस अवसर पर शोभा शर्मा बिजनौर, मूलचन्द्र मीणा, अशोक थपलियाल, प्रदीप सेमवाल, प्रो. बिहारी लाल शर्मा दिल्ली, अन्नपूर्णा बन्धुनी, राजीव राय, हेमन्त सिंह नेगी, रेखा नेगी, एसआर गुप्ता नोएडा, विनोद कुमार अग्रवाल बंबई, नवीन कमार छत्तीसगढ़ , जगदीश बावला देहरादून, नीलम रावत देहरादून, हरभजन सिंह दिल्ली, तरंजीत सिंह भसीन दिल्ली, अर्चना सिंघल दिल्ली, भर्ती सिंह बिजनौर, शांतिस्वरूप गुप्ता मेरठ, नानक चन्द्र गोयल गाजियाबाद सहित अन्य पदाधिकारी तथा संस्कृत विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे। संचालन प्रो. रतनलाल ने किया।

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