भारत में 2005 से अब तक 15 बार बर्ड फ्लू  का प्रकोप आया , कैसे बचें जानिये तरीका 

Newspoint24.com/newsdesk/

बर्ड फ्लू जिसे एवियन इन्फ्लूएंजा भी कहा जाता है एक वायरल इंफेक्शन है जो मुख्य रूप से और प्राकृतिक रूप से जंगली जलीय पक्षियों में देखने को मिलता है। दुनिया भर में बर्ड फ्लू के ढेरों स्ट्रेन मौजूद हैं जो पक्षियों में अलग-अलग गंभीरता की बीमारी का कारण बन सकते हैं। यूके के नैशनल हेल्थ सर्विस (एनचएचएस) ने बताया कि बर्ड फ्लू के 4 स्ट्रेन- H5N1 (1997 से लेकर अब तक) H7N9 (2013 से लेकर अब तक) H5N6 (2014 से लेकर अब तक) और H5N8 (2016 से लेकर अब तक) ने हाल के सालों में काफी चिंता पैदा की है। बर्ड फ्लू के ये आउटब्रेक्स (प्रकोप) एशिया, अफ्रीका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के देशों में साल 1997 से देखने को मिल रहे हैं। साल 2005-06 से लेकर अब तक भारत में भी बर्ड फ्लू का प्रकोप कई बार देखने को मिल चुका है।

बर्ड फ्लू के इन कॉमन स्ट्रेन्स में H5N8 एक ऐसा स्ट्रेन है जिसने दुनियाभर में अब तक एक भी इंसान को संक्रमित नहीं किया है। H5N1, H7N9 और H5N6 के मामले भी इंसानों में बेहद दुर्लभ हैं क्योंकि ये स्ट्रेन इंसानों को आसानी से संक्रमित नहीं कर सकते और इंसान से इंसान में इसका संक्रमण भी बेहद दुर्लभ है। बावजूद इसके बर्ड फ्लू प्रकोप के दौरान दुनियाभर के कई लोग इस फ्लू से संक्रमित हो चुके हैं और इस वजह से कई मौतें भी हुई हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मानें तो इंसानों में H5N1 बर्ड फ्लू का केस-फैटैलिटी रेट करीब 60 प्रतिशत है।

भारत में बर्ड फ्लू के मामले बढ़ रहे हैं। इससे देश में कोविड-19 महामारी के अलावा एक और स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। देश के कई राज्यों में बर्ड फ्लू से बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, केरल, मध्य प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और गुजरात में सैकड़ों-हजारों पक्षी बर्ड फ्लू का शिकार बने हैं। हालात देखते हुए केंद्र सरकार ने कई राज्यों में बर्ड फ्लू से संबंधित अलर्ट जारी कर दिया है। इसके तहत उन इलाकों से सैंपल इकट्ठा कर उनकी जांच करने के निर्देश दिए गए हैं, जहां से पक्षियों के मारे जाने की रिपोर्ट की गई है। साथ ही, केंद्र सरकार ने इन इलाकों में उन लोगों की पहचान करने को भी कहा है, जिनमें फ्लू के लक्षण संदिग्ध रूप से दिखाई दिए हैं। उधर, राज्य सरकारों ने अपने स्तर पर प्रोटोकॉल के तहत प्रभावित इलाकों में निषेधात्मक आदेश जारी किए हैं। 

बर्ड फ्लू से कैसे बचें - 

बर्ड फ्लू के मामले बढ़ते देख लोगों के बीच यह सवाल किया जा रहा है इस बीमारी से कैसे बचा जा सकता है। जानकार बताते हैं कि अगर कोई व्यक्ति बर्ड फ्लू से प्रभावित इलाके में रहता है तो वह निम्नलिखित तरीकों से अपना बचाव कर सकता है:

    पालतू पक्षियों से दूर रहें।
    संभव हो तो ग्रामीण इलाकों और छोटे खेतों तथा खुली हवा वाले बाजारों में जाने से परहेज करें।
    हाथों को अच्छे से धोएं। यह लगभग सभी प्रकार के संक्रमणों से बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले सबसे आसान और बेहतर उपायों में से एक है।
    हाथ धोने के लिए साबुन और सैनिटाइजर का इस्तेमाल कर सकते हैं। सैनिटाइर का उपयोग करने से पहले यह जरूर देख लें कि उसमें 60 से 70 प्रतिशत अल्कोहल शामिल हो।


    अगर आप किसी ऐसे इलाके में जा रहे हैं, जहां बर्ड फ्लू के मामले आ चुके हैं, तो पहले डॉक्टर से इन्फ्लूएंजा का टीका लगवाने को लेकर बात करें। यह टीका विशेष रूप से बर्ड फ्लू से सुरक्षा नहीं देता, लेकिन पक्षियों व ह्यूमन फ्लू वायरस एक साथ होने पर संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकता है।

जहां तक चिकन और अंडे की बात है तो पके हुए पोल्ट्री व अंडा उत्पाद स्वास्थ्य के लिए हानिकारक नहीं माने जाते हैं। फिर भी पोल्ट्री को संभालते और तैयार करते समय सावधानी बरतना सबसे उचित है, क्योंकि उसमें बैक्टीरिया शामिल हो सकते हैं। इस लिहाज से निम्नलिखित सावधानियां बरती जा सकती हैं:

    कटिंग बोर्ड, बर्तन व पोल्ट्री पदार्थों के संपर्क में आने वाली अन्य सभी सतहों को गर्म पानी के साथ साबुन से अच्छे से धोएं।
    अगर चिकन बना रहे हैं तो रस साफ होने तक उसे पकाते रहें। इसके लिए 165 फारेनहाइट यानी 74 डिग्री सेल्सियस के तापमान का इस्तेमाल करें।
    अंडों की ऊपरी परत पक्षियों के मल से दूषित हो सकती है। ऐसे में कच्चे और अधपके अंडों को अलग से संभालकर रखना चाहिए।

 

Share this story