नवरत्न कंपनी कॉनकोर को निजी हाथों बेचने का निर्णय दुर्भागयपूर्ण : कांग्रेस

नवरत्न कंपनी कॉनकोर को निजी हाथों बेचने का निर्णय दुर्भागयपूर्ण : कांग्रेस

newspoint 24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

नयी दिल्ली। कांग्रेस ने सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी कंटेनर कॉपरपोरेशन आफ इंडिया लिमिटेड-कॉनकोर के विनिवेश के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि लगातार लाभ में चलने वाली कंपनी को निजी हाथों बेचने का निर्णय दुर्भागयपूर्ण है।


कांग्रेस प्रवक्ता गौरव बल्लभ ने सोमवार को यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि कॉनकोर का कारोबार 1989 में शुरू हुआ और इसके पास अपने 60 डिपो हैं यानी उसकी अपनी जमीन है। कंपनी माल की ढुलाई का काम करती है और हर साल यह कंपनी लाभ में चलती है और हर साल लाभांश देती है। उनका कहना था कि इस कपंनी के पास जो भी जमीन है वह किसानों की है और किसानों ने रेलवे को बढ़ावा देने और उसके विस्तार के लिए इस जमीन को दिया था लेकिन अब इसी जमीन को 35 साल की लीज पर दिया जा रहा है।


उन्होंने कहा कि 2020-21 में कंपनी का नेट लाभ 503 करोड़ रुपए रहा है। हर साल कंपनी लाभ में चल रही है और हर वर्ष लाभांश देती है। मौजूदा वित्त वर्ष में कंपनी ने 304 करोड रुपए का लाभांश घोषित किया है। कंपनी को 54 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा भारत सरकार के पास है और शेष वित्तीय संस्थानों तथा अन्य के पास है। कंपनी की मार्केट वैल्यू 40 हजार करोड़ रुपए है लेकिन सरकार ने दुर्भाग्यपूर्ण कदम उठाते हुए इस कंपनी का 30.8 प्रतिशत हिस्सा एक निजी कंपनी को बेचने का निर्णय लिया है।


उन्होंने कहा कि मोदी सरकार इस सरकारी जमीन की लीज की नीति को भी बदल रही है और इसे छह प्रतिशत के स्तर से घटाकर दो से तीन प्रतिशत किया गया है। इसी तरह से लीज की पांच साल की अवधि को बढ़ाकर 35 साल या इससे ज्यादा किया जा सकता है।


प्रवक्ता ने कहा कि जिस कंपनी को यह बेचा जा रहा है उसे कॉनकोर की हिस्सेदारी खरीदने के लिए बहुत पैसे की जरूरत है। उसके पास इतना पैसा नहीं है और इसकी खरीद के लिए उसे कर्ज लेना पड़ेगा। सवाल है कि आखिर सरकार कोरोना काल में लाभ देने वाली कंपनी का विनिवेश क्यों कर रही है।

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