दिल्ली में कोयले से चलने वाला एक भी पावर प्लांट नहीं भाजपा फैला रही अफ़वाह एनटीपीसी आधी बिजली दे रहा है  : सत्येंद्र जैन

Satyendar Jain

Newspoint24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

नयी दिल्ली। दिल्ली के ऊर्जा मंत्री सत्येंद्र जैन ने कहा कि दिल्ली में एक भी कोयले से पॉवर प्लांट नहीं चलता है और भाजपा इस पर सिर्फ महज अफ़वाह फैला रही है।

श्री जैन ने कोयले की कमी के चलते विद्युत संकट को लेकर एक संवाददाता सम्मेलन में मंगलवार को कहा कि दिल्ली में एक भी कोयले से पॉवर प्लांट नहीं चलता है और भाजपा इस पर सिर्फ अफ़वाह फैला रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय तापविद्युत निगम लिमिटेड (एनटीपीसी) दिल्ली सरकार के करार के अनुसार 3500 मेगावाट बिजली देता था, लेकिन आज वह उसकी आधी यानी 1750 मेगावाट बिजली दे रहा है।

दिल्ली में गैस से चलने वाले बिजली के पावर प्लांट है, लेकिन केंद्र सरकार ने दिल्ली को निर्धारित दर पर गैस देना बंद कर दिया है, जिसके कारण दिल्ली सरकार को बिजली उत्पादन करने के लिए मार्केट रेट पर गैस खरीदनी पड़ रही है। इसकी वजह से बिजली उत्पादन दर बढ़ चुका है। इसके विपरीत दिल्ली में कोई भी पॉवर कट नहीं लग रहा है और दिल्ली सरकार दिल्ली के लोगों को 24 घंटे बिजली मुहैया करवा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या सच में देश में कोयले की कमी है या फिर जानबूझकर बिजली की कटौती की जा रही है?

उन्होंने कहा, “ दिल्ली में कोई भी कोयले से चलने वाला पॉवर प्लांट नहीं है। दिल्ली सारकार दिल्ली के बाहर स्थित कोयले के पॉवर प्लांट से बिजली खरीदती है। भाजपा कोयले से चलने वाले पावर प्लांट पर सिर्फ अफवाह फैला रही है। बिजली का बड़ा उत्पादक केंद्र सरकार की एनटीपीसी है। पिछले कुछ दिनों से एनटीपीसी ने अपने पॉवर प्लांट में बिजली का उत्पादन आधा कर दिया है। ऐसा उन्होंने एक प्लांट पर ही नहीं किया है, बल्कि देश में स्थित अपने सभी प्लांट में किया है।

5-6 राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने प्रधानमंत्री को इस विषय पर पत्र भी लिख चुके हैं। चाहे पंजाब हो, आंध्र प्रदेश हो, या उत्तर प्रदेश हो, सब जगह पॉवर कट लगाए जा रहे हैं। लेकिन दिल्ली सरकार ने दिल्ली में पॉवर कट नहीं लगने दिया है। दिल्ली सरकार महंगी बिजली खरीदकर भी दिल्ली के लोगों को 24 घंटे बिजली दे रही है। पावर कट करने के लिए दिल्ली सरकार को मजबूर किया जा रहा है क्यूंकि एनटीपीसी दिल्ली को आधी बिजली ही दे रहा है।”

ऊर्जा मंत्री कहा, “एक तरफ केंद्र सरकार कहती है कि कोयले की कोई कमी नहीं है और दूसरी तरफ बैठक कर कहती है कि कोयले की जिम्मेदारी अब केंद्रीय मंत्री संभालेंगे। केंद्र सरकार बताए कि कोयले की कमी है या नहीं है या फिर जानबूझकर ऐसा किया जा रहा है!”

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