मुंबई हाई कोर्ट का फरमान अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच सीबीआई जांच करे

Newspoint24 / newsdesk 
 
मुंबई। मुंबई उच्च न्यायालय ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को निर्देश दिए हैं कि वह मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह द्वारा महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों की प्राथमिक जांच करे।


मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी की खंडपीठ ने सीबीआई से कहा है कि वह पिछले महीने लेटर-बम में सिंह द्वारा उठाए गए मुद्दों पर 15 दिनों के भीतर प्राथमिक जांच पूरी करे।


अदालत ने 31 मार्च को सिंह की याचिका और इस मुद्दे से जुड़ी कुछ अन्य जनहित याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद अपने आदेश सुरक्षित रख लिए थे।

मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र जिसमें उन्होंने गृहमंत्री पर लगाए कुछ आरोप सिंह शुरुआत में अपनी याचिका लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे । सुप्रीम कोर्ट ने देखा था कि सिंह और देशमुख के बीच आरोप और काउंटर आरोप गंभीर हैं, लेकिन मामले की सुनवाई पहले हाईकोर्ट करे । इसके बाद सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के सामने याचिका दायर कर हाईकोर्ट को हटा दिया ।

इस बीच 30 मार्च को महाराष्ट्र सरकार ने आरोपों की जांच के लिए न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) कैलाश चंदिवाल की नियुक्ति की है ।

कोर्ट ने कहा कि, चूंकि राज्य सरकार ने उच्च स्तरीय जांच शुरू की है, कोई हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है । एडवोकेट जैश्री पाटिल की रिट याचिका पर विशेष रूप से CBI जांच का आदेश पारित किया गया । पूर्व मुंबई सीपी परम बीर सिंह के नेतृत्व में आपराधिक पीआईएल के संबंध में बेंच ने कहा कि वे किसी भी उपयुक्त मंच के सामने शिकायत करने और इस मामले में अपनी और अन्य सभी याचिकाओं के निस्तारण के लिए स्वतंत्र होंगे ।

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