कोरोना की दवाएं बांटने वाले सांसदों और विधायकों की सदस्यता खत्म की जाए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर

कोरोना की दवाएं बांटने वाले सांसदों और विधायकों की सदस्यता खत्म की जाए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर

Newspoint24 / newsdesk 

कोरोना संकट में राजनेताओं और मेडिकल माफिया के बीच बना गठजोड़

नेताओं को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करने की मांग

नई दिल्ली । राजनेताओं पर कोरोना की दवाओं की जमाखोरी करके उनका वितरण करने के आरोप में एफआईआर दर्ज करने और सीबीआई जांच की मांग करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट में एक याचिका दायर की गई है। याचिका में कहा गया है कि नेताओं की इस जमाखोरी से आम लोगों को इन दवाइयों से वंचित होना पड़ रहा है।

यह याचिका ह्रदय फाउंडेशन की ओर से डॉक्टर दीपक सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि कोरोना के इस गंभीर संकट में राजनेताओं और मेडिकल माफिया के बीच गठजोड़ बन गया है। याचिका में ऐसे नेताओं पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत गिरफ्तार करने की मांग की गई है। याचिका में जिन राजनेताओं का नाम लिया गया है उनमें दिल्ली से भाजपा के सांसद गौतम गंभीर, भाजपा गुजरात के अध्यक्ष, भाजपा के दक्षिणी महाराष्ट्र से विधायक शिरीष चौधरी, एनसीपी के शरद पवार और रोहित पवार का नाम शामिल है।

याचिका में कहा गया है कि गौतम गंभीर ने कोरोना की दवा फेबिफ्लू के मुफ्त वितरण की घोषणा की है। भाजपा गुजरात के अध्यक्ष ने रेमडेसिविर के पांच हजार इंजेक्शन मुफ्त में देने की घोषणा की है। महाराष्ट्र के भाजपा विधायक शिरीष चौधरी ने भी रेमडेसिविर बांटने की घोषणा की है। शरद पवार और रोहित पवार ने रेमडेसिविर के तीन सौ से इंजेक्शन बांटे हैं।

याचिका में मांग की गई है कि जो सांसद और विधायक कोरोना की दवाएं बांट रहे हैं, उनकी सदस्यता खत्म की जाए। ये लोग बिना लाइसेंस के दवाओं की जमाखोरी कर रहे हैं। ये अपनी राजनीतिक ताकत का बेजा फायदा उठाकर दवाएं बेच रहे हैं। इन नेताओं की वजह से आम लोगों के जीवन जीने के अधिकार का हनन हो रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से वकील गौरव पाठक ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। 

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