मध्यप्रदेश - 2020 : शिवराज सरकार में राज्‍य बना गेहूं उपार्जन में देश का अग्रणी

newspoint24.com/newsdesk

भोपाल । मध्‍य प्रदेश में कोरोना काल होते हुए भी 2020 में किसानों के हित के जो निर्णय हुए हैं, वे अब नया वर्ष लगने के साथ ही इतिहास बनने जा रहे हैं। किसान पुत्र मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने चौथी बार शपथ लेते ही कोरोना की संकटकालीन परिस्थितियों के मुकाबले के साथ अन्नदाता किसानों की सबसे पहले चिंता की। किसानों की फसल कट चुकी थी, 23 मार्च को चौहान ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब-तक खरीदी प्रारंभ करने की कोई तैयारी नहीं थी। किसानों के माथे पर चिंता की लकीरे थीं। 

वास्‍तव में यह चिंता कोविड-19 की भयावह तस्वीरों के कारण से थी, उन्‍हें लग रहा था कि इस बार उनका गेहूँ खरीदा भी जायेगा या नहीं। शपथ लेते ही मुख्यमंत्री ने समर्थन मूल्य पर गेहूँ खरीदी की प्रभावी तैयारियां कीं,  जिसके चलते प्रदेश में 15 अप्रैल से खरीदी प्रांरभ हुई। विपरीत परिस्थितियों में बेहतर तैयारियों और सतत मॉनिटरिंग से प्रदेश ने इस साल गेहूँ उपार्जन का ऑल टाइम रिकार्ड बनाया।

मध्य प्रदेश ने एक नया इतिहास रचा 

वर्ष 2020 में मध्य प्रदेश ने एतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए गेहूँ उपार्जन के मामले में देश के अग्रणी राज्य के रूप में नई पहचान स्थापित की। पंजाब जो परंपरागत रूप से गेहूँ उत्पादन में देश में सबसे आगे होता था वो स्थान आज मध्य प्रदेश ने प्राप्त कर लिया है। वर्ष  2020 में 129 लाख मीट्रिक टन से अधिक गेहूँ उपार्जन कर मध्य प्रदेश ने एक नया इतिहास रचा है।

उपार्जित गेहूँ के भुगतान की भी सरकार ने सुनिश्चित व्यवस्था की। कोरोना और लॉकडाउन के चलते इस वर्ष गेहूँ उपार्जन कर किसानों को प्राथमिकता के आधार पर राशि दी गई, जिसमें ग्रामीण अर्थ व्यवस्था को गति मिली। गेहूँ उपार्जन की प्रकिया में छोटे-छोटे भूखंड पर खेती करने वाले लघु और सीमांत किसानों को सबसे पहले सीधे लाभान्वित करने में सफलता मिली।

किसानों को हुआ रबी फसलों का बीमा प्रीमियम भुगतान 

पिछली सरकार ने खरीफ और रबी फसलों के लिए फसल बीमा प्रीमियम की राशि 2200 करोड़ रुपये का भुगतान बीमा कंपनियों को नहीं किया था। उसके कारण किसानों को बीमा राशि नहीं मिल रही थी। मुख्यमंत्री शिवराज ने बीमा राशि भुगतान करने का निर्णय लिया और इसके फलस्वरूप किसानों को शेष बीमा राशि मिली। जीरो प्रतिशत ब्याज पर किसानों को ऋण देने की योजना फिर शुरू की गई। चना, मूंग, उड़द की भी सरकारी खरीदी की गई। चने में 2 प्रतिशत तक तिवड़ा होने पर भी चने की खरीदी की गई। मध्य प्रदेश में चना, मसूर, सरसों प्रतिदिन प्रति व्यक्ति उपार्जन सीमा 40 क्विंटल को समाप्त कर दिया गया, इससे किसानों को इन फसलों की पूरी उपज समर्थन मूल्य पर बेचने की सुविधा मिली।

अब नए दौर में मध्य प्रदेश के किसान

कोरोना महामारी के संकटकाल में मध्य प्रदेश में किसानों को एक ऐसी सौगात दी गई, जिसका वे लंबे समय से इंतजार कर रहे थे। कोरोना संकट के दौर में किसानों को आर्थिक परेशानियों से बचाने के लिए मुख्यमंत्री  शिवराज सिंह ने एक ही झटके में मंडी अधिनियम में संशोधन करके किसानों को एक तरह से ग्लोबल मार्केटिंग से जोड़ने का करिश्मा कर दिखाया। आढ़त का काम कर रहे व्यापारियों को अगर लायसेंस राज से मुक्ति मिली है तो किसानों के लिए भी यह एक तरह से आर्थिक रूप से अपने को मजबूत बनाने का मौका कहा जा सकता है।  

उल्‍लेखनीय है कि मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य है जहां किसानों के हित में मण्डी एक्ट में संशोधन किया गया है। मण्डी एक्ट में संशोधन का सीधा फायदा किसान को हुआ है । अब उसे अपने उत्पादन का ज्यादा से ज्यादा फायदा मिल रहा है। इसके लिए किसानों को अब मंडियों के चक्कर काटने की जरूरत भी नहीं रही। मंडियों में किसानों को लंबे इंतजार के साथ अपनी उपज की गुणवत्ता को लेकर कई परेशानियों से दो-चार होना पड़ता था। मंडी अधिनियम में संशोधन के बाद अब किसान घर बैठ कर भी अपनी फसल निजी व्यापारियों को बेच रहा है। 

बिचौलियों की व्यवस्था समाप्‍त, किसान खुद बना व्‍यापारी 

कृषि मंत्री कमल पटेल कहते हैं कि मंडी में जाकर समर्थन मूल्य पर उपज बेचने का विकल्प किसान के पास जस का तस है। नई वैकल्पिक व्यवस्था बन जाने के बाद कृषि जिंसों के व्यापार में एक नई प्रतिस्पर्धा खड़ी होने से इसका फायदा किसानों को मिल रहा है। लायसेंसी व्यापारी अब किसान के घर या खेत पर जाकर भी उसकी फसल खरीदने आगे आ रहे हैं।  एक ही लायसेंस से व्यापारी प्रदेश में कहीं भी जाकर यह खरीददारी कर पा रहे हैं । इससे बिचौलियों की व्यवस्था खत्म हुई है। 

उनका कहना यह भी है कि सरकार ने ई-टेंडरिंग का भी इंतजाम किया है। वो देश की किसी भी मंडी में, जहां उसे दाम ज्यादा मिल रहे हों, अपनी फसल का सौदा कर सकता है। उन्‍होंने कहा कि नई व्यवस्था में किसानों से मंडी के बाहर उसके गांव से ही फूड प्रोसेसर, निर्यातक, होलसेल विक्रेता या फिर आखिरी उपयोगकर्ता सीधे किसान की उपज खरीद की ओर आगे आया है । इसका एक मतलब यह हुआ है कि आज की तारीख में किसान अब अपने उत्पादन का व्यापारी भी खुद बन चुका है। 

उनका कहना यह भी था कि प्रदेश में जीरो प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने के अलावा ब्याज पर सब्सिडी का मामला हो या फिर किसानों के हित में लाभकारी मूल्य देने जैसे कदम, मुझे लगता है कि एक किसान पुत्र होने के कारण किसानों की वास्तविक तकलीफों को चौहान बेहतर तरीके से समझते हैं। सरकार के इस कदम ने किसानों के लिए आर्थिक मंदी के इस दौर में एक नया रास्ता खोल दिया है। किसान के लिए आज बाजार बड़ा और व्यापक होता दिख रहा है।

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