सुनो दौपद्री शस्त्र उठा लो अब गोविंद न आयेंगे कब तक आस लगाओंगी तुम बिके हुये अखबारों से चित्रकूट में बोलीं प्रियंका

Priyanka's women's dialogue program in Chitrakoot, women should have half participation in politics

एक कवि की रचना “सुनो दौपद्री शस्त्र उठा लो अब गोविंद न आयेंगे।

कब तक आस लगाओंगी तुम बिके हुये अखबारों से। कैसी रक्षा मांग

रही हो दुशासन दरबारों से।” का जिक्र करते हुये उन्होने कहा कि

इस सरकार में महिलाओं का शोषण किया जा रहा है

Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ 


चित्रकूट। उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति को भयावह बताते हुये कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि राजनीति में हिंसा का खात्मा करने के लिये कम से कम 40 फीसदी महिलाओं का राजनीति में आना जरूरी है।

रामघाट में आयोजित महिला संवाद कार्यक्रम में प्रियंका ने बुधवार को कहा कि महिला का संघर्ष उसका अपना होता है। उसके लिये संघर्ष कोई नहीं करेगा। उसे अपनी शक्ति पहचाननी होगी । 40 फीसदी महिलाओं को राजनीति में आना होगा। जब तक महिलाये आगे नहीं बढेंगी। तब तक उनके लिये नीतियां कैसे बनेगी। एक महिला ही महिला के लिये नीतियां बना सकती है। महिलाओं की राजनीति में आधी भागीदारी होनी चाहिये । 40 फीसदी सिर्फ शुरूआत है। जब तक खुद समाज को बदलने को नहीं ठानेंगे। इस समाज में महिलाओं का शोषण होता रहेगा। ”

 एक महिला ही राजनीति,समाज और देश का बदल सकती है
उन्होने कहा कि वह डेढ साल से यूपी में काम कर रही हैं और यहां के लोगो विशेषकर महिलाओं के संघर्ष में शामिल होना चाहती हैं। वास्तव में राजनीति को बदलने की जरूरत है। लखीमपुर में केन्द्रीय राज्य मंत्री के बेटे ने किसानो को कुचल दिया। सरकार ने किसानो की बजाय उसकी मदद की। आज भी मंत्री महत्वपूर्ण मंचों पर भाजपा के नेताओं के साथ दिखते हैं। राजनीति में हिंसा को खत्म करने के लिये महिलाओं की जरूरत है। महिलाओं में करूणा और मदद का भाव होता है। राजनीति में करूणा भाव लाने,महिलाओं को सक्षम बनाने और हिंसा खत्म करने के लिये महिलाओ को मजबूत करने की जरूरत है। एक महिला ही राजनीति,समाज और देश का बदल सकती है।

लखनऊ में आशाओ की पुलिस पिटाई का उल्लेख
लखनऊ में आशाओ की पुलिस पिटाई का उल्लेख करते हुये उन्होने कहा “ जो तुम्हारा शोषण कर रहे है, उनसे रक्षा की उम्मीद कैसे करोगी। आशा बहुओं को लखनऊ में पुलिस ने इतनी बुरी तरह पीटा कि उसका हाथ टूट गया। चेहरे में सूजन आ गयी। उसका कसूर सिर्फ इतना था कि वह मुख्यमंत्री की सभा में अपनी मांगों को रखना चाह रही थी। पुलिस के रोकने पर उसने सिर्फ इतना पूछा कि मुझे क्यों गिरफ्तार किया जा रहा है।”

पीटे जाने वालों से हक नहीं मिल सकता
एक कवि की रचना “सुनो दौपद्री शस्त्र उठा लो अब गोविंद न आयेंगे। कब तक आस लगाओंगी तुम बिके हुये अखबारों से। कैसी रक्षा मांग रही हो दुशासन दरबारों से।” का जिक्र करते हुये उन्होने कहा कि इस सरकार में महिलाओं का शोषण किया जा रहा है, उससे रक्षा की उम्मीद नहीं की जानी चाहिये। पीटे जाने वालों से हक नहीं मिल सकता। अपने हक के लिये महिलाओं को खुद लड़ना होगा। अपना मन बनाना होगा कि वे आधी आबादी हैं तो राजनीति में अपना हक क्यों न मांगे। महिला को आंख बूंद कर वोट करो। कांग्रेस की पहल का अंत नहीं हो सकता। हो सकता है कि कुछ महिलाये सक्षम हो और जीत जाये मगर कुछ को हार भी मिले मगी जब वे अगली बार लडेगी तो ज्यादा सक्षम होकर लडेगी।कोई राजनीतिक दल उन्हे रोक नहीं पायेगा।

यूपी में स्थिति बहुत खराब है
उन्होने कहा “ यूपी में स्थिति बहुत खराब है। कुछ दिन पहले ललितपुर में खाद की लाइन में मारे गये किसानो के घर गयी थी। परिवार कर्ज में डूबा हुआ था। मृत किसानों की बेटी बीबी से मिलने के बाद सोचा कि सबसे ज्यादा मुश्किल तो महिला को होती है। घर में कोई कमाने वाला नहीं रहा। आप सब अपने घरों में महंगाई को बोझ उठा रही है। एक मुफ्त का सिलेंडर देकर सरकार सोचती है कि सब काम हो जायेगा। वह जानबूझ कर महिलाओं को आगे नहीं बढाना चाह रही है। ”

प्रवासी परिवारों को बसें नहीं दी कल मोदी जी आ रहे है उनको बसे दी जा रही है
प्रियंका ने कहा “ लाकडाउन के दौरान प्रवासी परिवार संघर्ष कर वापस आये। उस समय बसें नहीं दी। कल मोदी जी आ रहे है उनको बसे दी जा रही है।”

इस दौरान उन्होने अपनी प्रतिज्ञाओं को महिलाओं के सामने पढा कि किसानो का पूरा कर्ज माफ करेंगे। गेहू,धान 2500 में खरीदा जायेगा। बिजली का बिल हाफ करेंगे। कोरोना काल में छोटे दुकानदारों के बिजली के बिल माफ करायेंगे। आर्थिक मार झेलने वाले गरीब परिवारों को 25 हजार रूपये देंगे। 20 लाख सरकारी रोजगार बनवायेंगे जिनमें 40 फीसदी महिलाओं को जायें। किसी भी बीमारी में दस लाख तक का मुफ्त इलाज। छात्राओं को स्मार्ट फोन और स्कूटी। सरकारी बसों में महिलाओं को यात्रा मुफ्त। सरकारी पदों में आरक्षण के पहले से किये गये प्रावधान में महिलाओं के लिये 40 प्रतिशत पद। विधवा पेंशन में 1000 रूपये तक की बढोत्तरी। आशा बहुओं और आंगनबाडी कार्यकत्रियों को न्यूनतम दस हजार रूपये मानदेय। प्रदेश में हर जिले में केन्द्रीय विद्यालय की तरह 75 ऐसी पाठशाला जिसमें सिर्फ महिलाओं को शिक्षा के अलावा कौशल विकास सिखाया जायेगा।
 

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