डूब गए ममता का साथ छोड़ कमल पर सवार होने वाले विधायक ना माया मिली ना राम 

डूब गए ममता का साथ छोड़ कमल पर सवार होने वाले विधायक ना माया मिली ना राम

Newspoint24 / newsdesk 



कोलकाता । राजनीतिक रस्साकशी के मामले में बंगाल हर बार देश को चौंकाता रहा है और इस बार भी विधानसभा चुनाव के नतीजे पूरे देश में अप्रत्याशित हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में जब भाजपा ने 42 में से 18 सीटों पर जीत दर्ज की थी, तब सभी को लगा था कि 2021 के चुनाव में ममता को अपनी सरकार बचाए रखना मुश्किल होगा। इन अटकलों को और भी बल तब मिला था जब ममता के कई बड़े साथी और सियासत के धुरंधर सत्तारूढ़ पार्टी का साथ छोड़कर भाजपा के साथ हो लिए थे। लेकिन अब जब चुनाव परिणाम आ चुके हैं तो साफ हो गया है कि ममता का हाथ छोड़कर कमल पर सवार होने वाले अधिकतर विधायक डूब चुके हैं। 

चुनाव से पहले बड़ी संख्या में टीएमसी के नेता ममता का साथ छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए थे। हालांकि शुभेंदु अधिकारी समेत तृणमूल छोड़कर भाजपा में शामिल हुए कुछ उम्मीदवारों ने अपने तृणमूल प्रतिद्वंद्वियों से बेहतर प्रदर्शन किया। शुभेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नजदीकी मुकाबले में हराया, लेकिन राज्य के पूर्व मंत्री राजीब बनर्जी, सिंगुर से पूर्व विधायक रवींद्रनाथ भट्टाचार्य, अभिनेता रूद्रनील घोष और हावड़ा के पूर्व महापौर रथिन चक्रवर्ती चुनाव हार गए।

इस साल की शुरुआत में पार्टी बदलने वाले बनर्जी राजीब हावड़ा जिले की डोमजूर विधानसभा सीट से चुनाव हार गए। इसके पहले वह लगातार दो बार चुनाव जीते थे। 2016 में तो वह सबसे ज्यादा मतों से चुनाव जीतने वाले विधायक बने थे। लेकिन इस बार वह तृणमूल के कल्याण घोष से 42 हजार,620 मतों से हार गये। चुनाव में टिकट नहीं मिलने के बाद तृणमूल छोड़ने वाले भट्टाचार्य को सिंगुर से सत्तारूढ़ पार्टी के उम्मीदवार बेचाराम मन्ना ने करीब 26 हजार वोट से शिकस्त दी। भाजपा उम्मीदवार इस सीट से पुनर्मतदान की मांग कर रहे हैं।


 टाटा की छोटी कार परियोजना को हटाने के लिए किसानों के आंदोलन के बाद हुगली जिले का सिंगुर भारतीय राजनीति के नक्शे पर अंकित हो गया था। सिंगुर और नंदीग्राम ने 34 साल के वाम मोर्चे के शासन के आधार को हिलाकर रख दिया था, जिसके कारण 2011 में तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी सत्ता में आयीं। रुद्रानिल घोष हाल में भाजपा में शामिल हुए थे, उन्हें तृणमूल के नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने भवानीपुर से करीब 28 हजार वोट से शिकस्त दी।

इस सीट को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खाली किया था। इसी तरह रथिन चक्रवर्ती तृणमूल के नेतृत्व वाले हावड़ा नगर निगम में महापौर थे लेकिन चुनाव से पहले वह पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गये। उन्हें क्रिकेटर से नेता बने मनोज तिवारी ने शिवपुर से 32 हजार वोट से शिकस्त दी। हालांकि 2017 में भाजपा में शामिल हुए पार्टी उपाध्यक्ष मुकुल रॉय कृष्णानगर उत्तर से विजयी रहे। उन्होंने तृणमूल उम्मीदवार कौशानी मुखर्जी को 35 हजार मतों के अंतर से हराया। कुछ महीने पहले भाजपा में शामिल हुए मिहिर गोस्वामी ने भी तृणमूल उम्मीदवार रवींद्रनाथ घोष को हराकर नाताबाड़ी सीट से जीत दर्ज की। 

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