कोयले की कमी से निपटने के लिए राज्यों की मदद करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी : अशोक गहलोत  

कोयले की कमी से निपटने के लिए राज्यों की मदद करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी : अशोक गहलोत

Newspoint24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

जयपुर। देश में कोयले की कमी की खबरों के बीच , राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को इस मुद्दे पर केंद्र सरकार को फटकार लगाई और कहा कि राज्यों की मदद करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, "राज्यों की मदद करना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है। यह सर्वविदित है कि कोयले की कमी है , और राज्य परेशान हैं।" 

ये कोई विवाद का विषय नहीं होना चाहिए, ये पूरे कंट्री के अंदर, विशेष रूप से नॉर्थ इंडिया के अंदर बड़ा क्राइसिस है और हो सकता है क्राइसिस बढ़े आगे और केंद्र सरकार को पूरे राज्यों को को-ऑर्डिनेट करना चाहिए कि अधिकांश राज्य बिजली संकट को लेकर केंद्र सरकार को कन्वे कर चुके हैं, ये संकट कितना बड़ा होगा वो कोई नहीं कह सकता।

कोल इंडिया को चाहिए कि वो खुद आगे बढ़कर के, उसकी जिम्मेदारी भी है कि वो राज्यों से बातचीत करे, क्या रिक्वायरमेंट है, क्या उनकी दिक्कत है क्योंकि खाली, कोल माइन्स में पानी भर गया बरसात से, वो तो एक कारण हुआ।

पर जहां तक मुझे जानकारी मिली है, कई जो प्लांट थे जो कॉन्ट्रेक्टर थे उनके, वो कॉन्ट्रेक्टर खुद ही फेल हो गए। तो ये क्राइसिस पूरी कंट्री में है, करीब-करीब काफी राज्यों में है और दिल्ली राजधानी है, वो तो आप देख रहे हो कि क्या हो रहा है, ब्लैकआउट होने तक की बातें होने लग गई हैं, चीन में पूरा क्राइसिस है, यूरोप में क्राइसिस है।

कोयले के जो दाम हैं दुनिया के मुल्कों में, इंडोनेशिया सहित, वो 4-5 गुना ज्यादा बढ़ गए हैं और बढ़ने के बावजूद भी कोयला मिल नहीं रहा है, दाम बढ़ गए, कोयला अवेलेबल नहीं है फिर भी, स्थिति बड़ी अजीबोगरीब बन रही है, सुनकर ही आश्चर्य होता है कि कोई कहे कि अगर मार्च के अंदर, मार्च तक ये कोल का संकट रहेगा, ये सुनकर ही हमें आश्चर्य होता है और दुःख होता है, तो ऐसे वक्त में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है बहुत बड़ी कि तमाम राज्यों को संकट से निकाले।

500 करोड़ बकाया है, 600 करोड़ बकाया है, ये तो बहुत मामूली बातें हैं। जहां करोड़ों-अरबों रुपए का कोयला बिकते हैं और खरीदते हैं, वहां 500 करोड़ रुपए क्या मायने रखते हैं? इस प्रकार की खबरें देने का कोई फायदा नहीं है। केंद्र की जिम्मेदारी है और मुझे उम्मीद है कि जो केंद्रीय ऊर्जा मंत्री हैं, वो सक्षम हैं। मुझे उम्मीद है कि वो जिस प्रकार से को-ऑर्डिनेट कर रहे हैं राज्यों को बिजली को लेकर, वो कोई हल निकालेंगे, बजाय इसके कि हम लोग राज्यों के ऊपर जिम्मेदारी डाल दें कि कोई कमी नहीं है कोयले की ये कहना ही मैं समझता हूं कि बेईमानी है पूरी तरह। कोयले की कमी है, सबको मालूम है, राज्य संकट में हैं और उस संकट से निकालने की जिम्मेदारी केंद्र की बनती है।

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इस बीच कोयले से बिजली संकट की खबरों के बीच केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को कहा कि जीवाश्म ईंधन की कमी बारिश के कारण हुई है, जिससे इसकी अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि हुई है।

उन्होंने आगे बताया कि आयातित कोयला बिजली संयंत्र या तो 15-20 दिनों के लिए बंद थे या बहुत कम उत्पादन कर रहे थे, जिससे घरेलू कोयले पर दबाव पड़ रहा था ।

 केंद्रीय मंत्री ने कहा, "बारिश के कारण, कोयले की कमी थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि हुई - 60 रुपये प्रति टन से 190 रुपये प्रति टन। इसके बाद, आयातित कोयला बिजली संयंत्र या तो बंद हो गए। 15-20 दिन या बहुत कम उत्पादन। इससे घरेलू कोयले पर दबाव पड़ा ।"

उन्होंने आश्वासन दिया, "हमने अपनी आपूर्ति जारी रखी है, यहां तक ​​कि बकाया के बावजूद भी जारी रखा है। हम उनसे (राज्यों) स्टॉक बढ़ाने का अनुरोध कर रहे हैं। कोयले की कमी नहीं होगी ।"

उन्होंने आगे कहा कि सोमवार को कोयला मंत्रालय ने अब तक की सबसे अधिक मात्रा में 19.4 मिलियन टन कोयले की आपूर्ति की । 

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