अगर राष्ट्र को सशक्त बनाना है तो हिंदू समाज को सामर्थ्य बनना होगा: भागवत

If the nation is to be empowered, then Hindu society has to become a force: Bhagwat

Newspoint24/ संवाददाता /एजेंसी इनपुट के साथ

 
नोएडा। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सरसंघचालक ( संघ प्रमुख ) मोहन भागवत ने कहा है कि भारत के विभाजन की पीड़ा का समाधान बंटवारे को निरस्त करना ही है।

  भागवत ने गुरुवार को यहां कृष्णा नंद सागर लिखित पुस्तक ‘विभाजनकालीन भारत के साक्षी के लोकार्पण’ समारोह के दौरान अपने संबोधन में कहा कि यह 2021का भारत है, 1947 का नहीं। एक बार विभाजन हो चुका है अब दुबारा नहीं होगा। जो ऐसा सोचते हैं, उनके खुद खंडित हो जाएंगे।

उन्होंने कहा कि भारत की विचारधारा सबको साथ लेकर चलने वाली है। यह अपने को सही और दूसरों को गलत मानने वाली विचारधारा नहीं है। इस्लामिक आक्रांताओं की सोच इसके विपरीत दूसरों को गलत और अपने को सही मानने वाला थी। पूर्व में यही संघर्ष का मुख्य कारण था। अंग्रेजों की सोच भी ऐसी थी और उन्होंने 1857 के विद्रोह के पश्चात हिन्दू मुस्लिम के बीच विघटन को बढ़ावा दिया।


 भागवत ने कहा हमें इतिहास को पढ़ना और उसके सत्य को वैसे ही स्वीकार करना चाहिए। अगर राष्ट्र को सशक्त बनाना है और विश्व कल्याण में योगदान करना है तो उसके लिए हिंदू समाज को सामर्थ्य बनना होगा।


‘एक बार विभाजन हो चुका है, अब दोबारा नहीं होगा’

संघ प्रमुख ने कहा कि ये 2021 का भारत है, 1947 का नहीं। एक बार विभाजन हो चुका है, अब दोबारा नहीं होगा। जो लोग ऐसा सोचते हैं, वो खुद खंडित हो जाएंगे।  

सरसंघचालक मोहन भागवत शुक्रवार को मध्य प्रदेश में ग्वालियर आएंगे और गुरुवार से यहां शुरू हुए चार दिवसीय ‘घोष शिविर’ को संबोधित करेंगे। संघ के मध्य भारत प्रांत के संघचालक अशोक पांडे ने बताया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मध्य भारत प्रांत का चार दिवसीय प्रांतीय स्वर साधक संगम (घोष शिविर) 25 नवंबर को सरस्वती शिशु मंदिर केदारधाम परिसर ग्वालियर में शुरू हुआ। उन्होंने कहा कि इस शिविर में 26 नवंबर से सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत आएंगे और 28 नवंबर को स्वर साधकों के प्रदर्शन के बाद उन्हें संबोधित करेंगे। पांडे ने बताया कि इस स्वर साधक संगम में मध्य भारत प्रांत के करीब 500 घोषवादक भाग ले रहे हैं।

पिछले हफ्ते शुक्रवार को धर्मांतरण कराने में शामिल लोगों और संस्थाओं को इशारों-इशारों में चेतावनी देते हुए मोहन भागवत ने कहा कि हमें किसी का मतांतरण नहीं करवाना है, बल्कि जीने का तरीका सिखाना है। ऐसी सीख सारी दुनिया को देने के लिए हमारा जन्म भारत भूमि में हुआ है। हमारा पंथ किसी की पूजा पद्धति, प्रांत और भाषा बदले बिना उसे अच्छा मनुष्य बनाता है। कोई किसी को बदलने या मतांतरण की चेष्टा न करें, सबका सम्मान करें।

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