गांधीजी की देशभक्ति भारतीय जीवन मूल्यों पर आधारित थी: मोहन भागवत

Newspoint24.com/newsdesk/


नई दिल्ली । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहनराव भागवत ने शुक्रवार को कहा कि गांधी जी के हिन्द स्वराज की स्थापना के लिए जरूरी है कि भारतीय समाज में मत, पंथों और संप्रदायों के बीच आत्मीयता, निर्भयता और सद्भाव रहे। भारतीय संस्कृति इन्हीं जीवन मूल्यों को सिखाती है।

संघ प्रमुख मोहनराव भागवत शुक्रवार (1 जनवरी) को दिल्ली के राजघाट के सामने स्थित सत्याग्रह मंडप में महात्मा गांधी पर लिखी पुस्तक ‘एक हिंदू देशभक्त बनना: गांधीजी की हिंद स्वराज की पृष्ठभूमि’ का विमोचन किया। यह पुस्तक प्रसिद्ध  शोधार्थी जितेन्द्र कुमार बजाज और एमडी श्रीनिवास ने लिखी है। पुस्तक को हर आनंद पब्लिकेशन ने किया है। समारोह में केन्द्रीय संस्कृति मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल भी उपस्थित थे। कांची कामकोटि पीठ्म के शंकराचार्य विजयेंद्र सरस्वती जी महाराज ने  भी वर्जुअल माध्यम से जुड़कर आशीर्वचन दिया। 

समारोह को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहनराव भागवत ने कहा कि हिन्दू इस देश को पवित्र भूमि और अपनी भूमि मानता है। यही बात गांधीजी ने भी कही थी कि ‘मेरी देशभक्ति मेरे धर्म से निकलती है’। साथ ही भागवत ने कहा कि विश्व के अन्य भाषाओं में धर्म का समानार्थी शब्द नहीं है। गांधीजी मानते थे कि हिन्दू धर्म किसी दायरे में नहीं बंधा है बल्कि सभी धर्मों का धर्म है। यह अनुभूति से समझा जाता है जिसे जानने की परंपरा आज भी जारी है।

उन्होंने कहा कि भारत के जीवन मूल्य शास्वत हैं। इन जीवन मूल्यों की रक्षा के लिए समाज में आचरण की शक्ति पैदा होनी चाहिए जिससे समाज अपनी कमियां दूर कर सके। साथ ही पुरूषार्थ की शक्ति भी चाहिए जिससे धर्म के अनुरूप आचरण करने वालों की रक्षा हो सके। इसके लिए जरूरी है कि लोगों को संस्कार की शिक्षा दी जाए। संस्कार के लिए जरूरी है कि अपने ज्ञान का स्वाध्याय किया जाए। इसमें पढ़े-लिखे समाज की भूमिका ज्यादा बड़ी है कि उन्हें ही यह आचरण सिखाना है।

पुस्तक के लेखक जे.के. बजाज सेंटर फॉर पॉलिसी स्टडीज के संस्थापक निदेशक और भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य हैं। एमडी श्रीनिवास सेंटर फ़ॉर पॉलिसी स्टडीज़ के संस्थापक अध्यक्ष हैं। 

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