दिल्ली हाईकोर्ट : केन्द्र सरकार यूट्यूब व्लॉगर कार्ल रॉक को काली सूची में डालने का रिकॉर्ड उपलब्ध कराये 

दिल्ली हाईकोर्ट ने केन्द्र सरकार से यूट्यूब व्लॉगर कार्ल रॉक को काली सूची में डालने का रिकॉर्ड उपलब्ध कराये जाने को कहा

Newspoint 24 / newsdesk

नयी दिल्ली।  दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को यूट्यूब व्लॉगर कार्ल रॉक (कार्ल एडवर्ड राइस) की पत्नी मनीषा मलिक द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्र सरकार से जवाब मांगा जिसमें उनके पति को काली सूची में डालने के सरकार के फैसले को चुनौती दी गई, जिसके तहत उन्हें भारत में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने कहा,“ उन्हें प्रवेश से वंचित करना केंद्र सरकार का विशेषाधिकार हो सकता है, लेकिन यह कारण बताते हुए न्यायोचित होना चाहिए। इसमें आप सही हो सकते हैं, यह आपका विशेषाधिकार है कि किसे देश में आने देना है और किसे नहीं। लेकिन यह रिकार्ड पर न्यायोचित होना चाहिए।”

पीठ ने सरकार से इस पर जवाब मांगा और मामले की अगली सुनवाई 23 सितंबर को हाेगी।

मनीषा मलिक भारतीय नागरिक है। उन्होंने अपनी याचिका में कहा कि कार्ल रॉक को काली सूची में डालने के निर्णय को रद्द कर दिया जाना चाहिए और उसके वीजा के संबंध में कोई भी निर्णय लेने से पहले उनकी सुनवाई होनी चाहिए।

याचिकाकर्ता मलिक ने अपनी याचिका में कहा कि वर्ष 2019 में उनकी शादी के बाद, कार्ल रॉक को कुछ शर्तों के साथ एक्स-2 वीजा दिया गया था। शर्तों में से एक यह थी कि उन्हें संबंधित विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय को सूचित करने के लिए 180 दिनों में भारत से बाहर जाना होगा। उन्हीं शर्ताें को पालन करते हुए राइस (कार्ल रॉक) 10 अक्टूबर, 2020 को भारत से चले गए थे।

याचिका में दलील दी गई है कि वह तब से वह भारत नहीं लौट पाए, क्योंकि भारतीय वीजा जारी करने के किसी भी आवेदन को भारत सरकार खारिज कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि कई बार अपनी शिकायत प्रतिवादियों के सामने रखी लेकिन उन्होंने न तो कोई प्रतिक्रिया दी है और न ही उसकी प्रगति पर कुछ बताया गया है।

याचिका में कहा गया है कि उनके द्वारा गृह मंत्रालय और राइस द्वारा न्यूजीलैंड में भारतीय उच्चायुक्त को बार-बार प्रतिवेदन के बावजूद उन्हें ब्लैकलिस्ट में डाल दिया गया और इस संबंध में प्रतिवादियों द्वारा पूरी तरह से गैर-जिम्मदाराना रवैया अपनाया गया है।
 

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