दिल्ली सरकार के कामों में अड़ंगा लगा रही केंद्र सरकार : सिसोदिया

Manish Sisodia

Newspoint 24/ newsdesk


नयी दिल्ली।  उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार बार-बार उपराज्यपाल के माध्यम से जनता द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार के कामों में अड़ंगा लगाकर लोकतंत्र की हत्या कर रही है।
श्री सिसोदिया ने शुक्रवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार ने पहले भी उपराज्यपाल के माध्यम से दिल्ली सरकार द्वारा तय वकीलों के पैनल को रिजेक्ट करने की कोशिश की है लेकिन दिल्ली कैबिनेट ने आज ये तय किया है कि अदालत में दिल्ली सरकार द्वारा चयनित वकीलों पैनल ही पक्ष रखेगा।


उपमुख्यमंत्री ने कहा कि ये बहुत दुखद है कि केंद्र सरकार बार-बार उपराज्यपाल के माध्यम से जनता द्वारा चुनी हुई दिल्ली सरकार के कामों में अड़ंगा लगाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि वकीलों की नियुक्ति तबादले विषय का हिस्सा है और इस पर निर्णय लेने का अधिकार राज्य सरकार के पास है। उसके बावजूद उपराज्यपाल द्वारा इसमें बार-बार हस्तक्षेप करना संविधान के खिलाफ जाना है।


भारतीय संविधान में केंद्र सरकार, दिल्ली सरकार और उपराज्यपाल के कार्य अच्छी तरह से परिभाषित है। साथ ही चार जुलाई 2018 को उच्चतम न्यायालय के पांच वरिष्ठतम न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने निर्णय दिया था कि ट्रांसफर्ड विषय में निर्णय लेने का अधिकार दिल्ली सरकार का है। उपराज्यपाल का नहीं। उपराज्यपाल के पास सरकार के निर्णय में अपना ओपिनियन देने के लिए वीटो पावर दी गई है। लेकिन संवैधानिक पीठ ने व्याख्या की थी कि उपराज्यपाल केवल अति-दुर्लभ स्थिति में ही अपने वीटो का इस्तेमाल कर सकते है। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि संवैधानिक बेंच के निर्णय के खिलाफ जाते हुए उपराज्यपाल द्वारा रोज अपने वीटो का दुरुपयोग कर जनता की चुनी हुई सरकार को जनहित के कामों को करने से रोका जा रहा है। और इस तरह से लोकतंत्र की हत्या की जा रही है।


उन्होंने कहा कि जनता ने श्री अरविंद केजरीवाल को अपना मुख्यमंत्री चुना है। तो जनता के द्वारा चुनी हुई सरकार को जनता के हितों के लिए काम करने दिया जाए। किसानों की मदद करने के बजाय किसान विरोधी केंद्र सरकार उपराज्यपाल के सहारे दिल्ली सरकार को किसानों की मदद करने से रोक रही है। साथ ही उपराज्यपाल द्वारा रोज अपने वीटो पावर का दुरुपयोग कर सरकार को काम करने से रोकना लोकतंत्र का मज़ाक बनाना है। इस तरह के मामले में जब आप अपने वीटो पावर इस्तेमाल करते हैं तो आप संविधान का भी मजाक बनाते हैं, शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ जाते हैं और साथ-साथ में फैसलों की भी हत्या करते हैं। उपमुख्यमंत्री ने नसीहत देते हुए कहा कि उपराज्यपाल दिल्ली को अपना काम करने दे और दिन में तीन बार वीटो लगाना बंद करे।

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