नीतिगत दरें यथावत, महंगाई बढ़ने का जोखिम बरकरार जानें मौद्रिक नीति की मुख्य बातें 

RBI Governor Shaktikanta Das
Newspoint24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 


मुंबई।  पेट्रोल डीजल की कीमतों में हो रही बढोतरी से आगे महंगाई बढ़ने की आशंका और कोरोना की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था के तीव्रता से पटरी पर लौटने के संकेत देते हुये भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज अपनी नीतिगत दरों को यथावत रखने का निर्णय लिया। हालांकि उसने अपने मौद्रिक नीति के रूख को समायोजन वाला रखने का भी फैसला किया जिससे आवश्यकता अनुसार नीतिगत दरों में बदलाव किया जा सकता है।

नीतिगत दरों को आठवी बार यथावत रखने का फैसला किया है। समिति के अध्यक्ष सहित छह लोगों में से पांच ने नीतिगत दरों को यथावत रखने और मौद्रिक नीति के रूख को समायोजन वाला बनाये रखने के पक्ष में मत दिया जबकि एक सदस्य ने विरोध में मतदान किया।


आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता में केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नी​ति समीति की आज समाप्त तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक में सभी नीतिगत दरों को अपरिवर्तित रखने का निर्णय किया गया। रेपो दर को चार प्रतिशत, रिवर्स रेपो दर को 3.35 प्रतिशत, मार्जिनल स्टैंडिंग फैसिलिटी दर को 4.25 प्रतिशत और बैंक दर को 4.25 प्रतिशत पर स्थिर रखा गया है। नकद आरक्षी अनुपात चार प्रतिशत और एसएलआर 18 प्रतिशत पर बना रहेगा।


बैठक के बाद श्री दास ने बताया कि वित्त वर्ष 2021-22 में वास्तविक जीडीपी की विकास दर 9.5 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। कोरोना की दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था तेजी से पटरी पर लौट रही है और टीकाकरण में तेजी आने से आगे इसमें तीव्र सुधार होने के संकेत हैं। रिजर्व बैंक ने आखिरी बार 22 मई 2020 को नीतिगत दरों में बदलाव किया था।


श्री दास ने कहा कि चालू वित्त वर्ष 2021-22 में देश की वास्तविक जीडीपी में 9.5 फीसदी की तेजी का अनुमान लगाया है। इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 7.9 फीसदी, तीसरी तिमाही में 6.8 फीसदी और चौथी तिमाही में 6.1 फीसदी। वित्त वर्ष 2022-23 में देश की वास्तविक जीडीपी 17.2 फीसदी रह सकती है।
उन्होंने कहा कि चालू वित्त वर्ष में महंगाई का जोखिम बना हुआ है और मार्च 2022 में समाप्त होने वाले वित्त वर्ष में इसके 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान है। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही में यह 5.1 प्रतिशत पर रह सकता है। तीसरी तिमाही में यह 4.5 प्रतिशत और चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में इसके बढ़कर 5.8 प्रतिशत पर पहुंचने की आशंका है। हालांकि अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में यह फिर से 5.2 प्रतिशत पर आ सकता है। उन्होंने कहा कि महंगाई को काबू में करने के लिए पेट्रोल और डीजल की कीमतों मे कमी लाये जाने की जरूरत है।

मौद्रिक नीति की मुख्य बातें


भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को मौद्रिक नीति समिति की द्विमासिक बैठक में लिए गये निणर्याें की घोषणा की जिसकी मुख्य बातें निम्नलिखित हैं

  1. मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने लगातार आठवीं बार प्रमुख नीतिगत दर (रेपो) को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
  2.  इसके परिणामस्वरूप रिवर्स रेपो भी 3.35 प्रतिशत पर कायम।
  3.  बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर बरकरार।
  4.  रिजर्व बैंक आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिये मौद्रिक नीति के रुख को समायोजन वाला बनाये रखेगा।
  5.  चालू वित्त वर्ष में खुदरा मुद्रास्फीति 2021-22 में 5.3 प्रतिशत पर रहने का अनुमान, अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही में घटकर 5.2 प्रतिशत पर आने की संभावना।
  6.  रिजर्व बैंक ने जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) वृद्धि दर 9.5 प्रतिशत पर बरकरार रखा।
  7.  कोविड महामारी के बाद से आरबीआई ने उसके दुष्प्रभाव को कम करने के लिये 100 से अधिक उपायों की घोषणा की।
  8.  मौद्रिक नीति समिति की अगली बैठक 6 से 8 दिसंबर को होगी।

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