नहीं बनी बात सरकार-किसान नेताओं की बैठक में , अब आठ जनवरी होगी मीटिंग 

Newspoint24.com/newsdesk/


नई दिल्ली । सरकार और किसानों के बीच देश में जारी आंदोलन खत्म करने के लिए जारी प्रयास सातवें दौर की बातचीत में भी सफल नहीं हो पाए,  क्योंकि तीन नए कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की मांग पर अड़े रहे। सरकार नए कृषि कानूनों पर किसान संगठनों की आपत्तियों और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर चर्चा करने पर जोर दे रही थी, जबकि किसान नेता सबसे पहले कानूनों की वापसी पर फैसला लिए जाने की मांग कर रहे थे।


सोमवार को हुई बातचीत का एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि दोनों पक्ष आठ जनवरी को बातचीत करने पर सहमत हो गए। बैठक के बाद केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेन्द्र सिंह तोमर ने बैठक के बाद कहा कि हम चाहते थे कि किसान यूनियनें तीन कानूनों पर चर्चा करें। हम किसी भी समाधान तक नहीं पहुँच सकते क्योंकि किसान यूनियन कानूनों को निरस्त करने पर अड़े रहे। उन्होंने कहा कि चर्चा का माहौल अच्छा था परन्तु किसान नेताओं के कृषि क़ानूनों की वापसी पर अड़े रहने के कारण कोई रास्ता नहीं बन पाया। 08 जनवरी को अगली बैठक होगी। किसानों का भरोसा सरकार पर है इसलिए अगली बैठक तय हुई है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सबके हित का ख्याल कर फैसला लिया जाएगा। तोमर ने कहा कि हम चाहते  हैं कि किसान यूनियन की तरफ से वो विषय आए जिस विषय में किसान को कोई परेशानी होने वाली है, उस विषय पर सरकार खुले मन से विचार करने को तैयार है।

वहीं, किसान नेता राकेश टिकैत ने बैठक के बाद कहा कि 08 जनवरी को सरकार के साथ फिर से मुलाकात होगी। तीनों कृषि क़ानूनो को वापिस लेने पर और एमएसपी दोनों मुद्दों पर उस दिन फिर से चर्चा की जाएगी । उन्होंने कहा कि हमने सरकार को स्पष्ट कर दिया है कि क़ानून वापसी नहीं तो घर वापसी नहीं।

बैठक में किसान संगठन के प्रतिनिधि एमएसपी पर सरकार से लिखित आश्वासन पर अड़े रहे। उनकी मांग थी कि सरकार एमएसपी को लेकर कानून बनाएं।

उल्लेखनीय है कि पिछले माह 30 दिसम्बर को केंद्र सरकार और संघर्षरत किसान संगठनों के नेताओं के बीच कृषि कानूनों को लेकर जारी गतिरोध समाप्त करने की दिशा में एक सकारात्मक नतीजा सामने आया था। दोनों पक्षों के बीच आंदोलन से जुड़े दो मुद्दों पर सहमति बन गई थी। बैठक में सरकार ने पर्यावरण संबंधी मुद्दे के समाधान के लिए अध्यादेश जारी करने का भरोसा दिलाया। इसी तरह, बिजली संशोधन विधेयक को वापस लिए जाने  और सिंचाई के लिए बिजली पर मिलने वाली सब्सिडी जारी रखनेका भी आश्वासन दिया गया था।

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