पेगासस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं करेंगे केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा 

पेगासस मामले में विस्तृत हलफनामा दाखिल नहीं करेंगे केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा

newspoint 24 / newsdesk / एजेंसी इनपुट के साथ 

नयी दिल्ली। बहुचर्चित पेगासस मामले पर आज शीर्ष अदालत में सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने कहा कि ऐसे मामलों में एफिडेविट दाखिल नहीं किया जा सकता।लेकिन वह जासूसी के आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित करने को राजी है। 


 केंद्र सरकार ने अपनी ओर से साफ साफ़ कहा कि वह इस मामले पर कोई एफिडेविट भी दाखिल नहीं करेगी।  

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट से कहा, कि "किसी विशेष सॉफ़्टवेयर का उपयोग किया गया था या नहीं, इसका अस्तित्व एक हलफनामे में सार्वजनिक चर्चा का विषय नहीं बन सकता। लक्षित समूहों, आतंकवादी समूहों को यह नहीं पता होना चाहिए कि किस सॉफ्टवेयर का उपयोग किया जा रहा है।"

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, "हम डोमेन विशेषज्ञों की एक समिति का गठन करेंगे। याचिकाकर्ता जो कहते हैं कि उनकी संख्या को इंटरसेप्शन के तहत रखा गया था, उन पर समिति विचार कर सकती है। समिति की रिपोर्ट आपके आधिपत्य के सामने रखी जाएगी।"

वरिष्ठ पत्रकार एन राम की ओर से पेश अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि केंद्र का यह कर्तव्य है कि वह अदालत में उपलब्ध सभी तथ्यों और सूचनाओं का खुलासा करे। सिब्बल ने कहा कि "सरकार और याचिकाकर्ता दोनों को मौलिक अधिकारों को बनाए रखने के लिए अदालत की आंख और कान होना चाहिए"।

सिब्बल ने कहा, "केंद्र अब कह रहा है कि हम आपको कुछ नहीं बताएंगे। यह बताना कि पेगासस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल किया गया था या नहीं, यह राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए हानिकारक नहीं है। अगर पेगासस का इस्तेमाल किया गया था और लक्ष्य आम नागरिक थे, तो यह बहुत गंभीर स्थिति है।"

सिब्बल ने आगे कहा, "उन्होंने संसद में स्वीकार किया है कि स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने 2019 के बाद से कोई कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या उन्होंने जांच शुरू की? एक प्राथमिकी दर्ज की? यह अविश्वसनीय है कि भारत सरकार कहती है कि मैं अदालत को नहीं बताऊंगा," ।

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