सम्वत साल की आखिरी एकादशी पापमोचिनी एकादशी का कब करें पारण

Newspoint24.com/newsdesk

पापमोचिनी एकादशी बुधवार, अप्रैल 7, 2021 को


8वाँ अप्रैल को, पारण ( व्रत तोड़ने का ) समय - 01:15 दोपहर  से 03:46 दोपहर तक 


पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय - 08:40 सुबह 
एकादशी तिथि प्रारम्भ - अप्रैल 07, 2021 को 02:09 मध्यरात्रि  बजे
एकादशी तिथि समाप्त - अप्रैल 08, 2021 को 02:28 मध्यरात्रि बजे

पापमोचिनी एकादशी  पर चौघड़िया मुहूर्त्त
दिन का चौघड़िया
05:43 प्रातः 
लाभ - उन्नति 05:43 ए एम से 07:18 ए एम
अमृत - सर्वोत्तम 07:18 ए एम से 08:52 ए एम
काल - हानि 08:52 ए एम से 10:26 ए एमकाल वेला
शुभ - उत्तम 10:26 ए एम से 12:00 पी एम
रोग - अमंगल 12:00 पी एम से 01:34 पी एम  
उद्वेग - अशुभ 01:34 पी एम से 03:09 पी एम
चर - सामान्य 03:09 पी एम से 04:43 पी एम
लाभ - उन्नति 04:43 पी एम से 06:17 पी एम


रात्रि का चौघड़िया


06:17 पी एम 
उद्वेग - अशुभ 06:17 पी एम से 07:43 पी एम
शुभ - उत्तम 07:43 पी एम से 09:08 पी एम
अमृत - सर्वोत्तम 09:08 पी एम से 10:34 पी एम
चर - सामान्य 10:34 पी एम से 12:00 पी एम
रोग - अमंगल 12:00 पी एम से 01:25 ए एम, अप्रैल 08
काल - हानि 01:25 ए एम से 02:51 ए एम, अप्रैल 08
लाभ - उन्नति 02:51 ए एम से 04:17 ए एम, अप्रैल 08काल रात्रि
उद्वेग - अशुभ 04:17 ए एम से 05:42 ए एम, अप्रैल 08

2021 पापमोचिनी एकादशी


  पापमोचिनी एकादशी होलिका दहन और चैत्र नवरात्रि के मध्य में आती है उसे पापमोचिनी एकादशी के रूप में जाना जाता हैं। यह सम्वत साल की आखिरी एकादशी है और युगादी से पहले पड़ती हैं।

उत्तर भारतीय पूर्णिमान्त पञ्चाङ्ग के अनुसार चैत्र माह में कृष्ण पक्ष के दौरान और दक्षिण भारतीय अमान्त पञ्चाङ्ग के अनुसार फाल्गुन माह में कृष्ण पक्ष के दौरान पापमोचिनी एकादशी पड़ती है। पूर्णिमान्त पञ्चाङ्ग और अमान्त पञ्चाङ्ग का यह भेद नाम-मात्र का है और दोनों पञ्चाङ्गों में पापमोचिनी एकादशी का व्रत एक ही दिन पड़ता है। 

एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहते हैं। एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है। एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है। यदि द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है। द्वादशी तिथि के भीतर पारण न करना पाप करने के समान होता है।

एकादशी व्रत का पारण हरि वासर के दौरान भी नहीं करना चाहिए। जो श्रद्धालु व्रत कर रहे हैं उन्हें व्रत तोड़ने से पहले हरि वासर समाप्त होने की प्रतीक्षा करनी चाहिए। हरि वासर द्वादशी तिथि की पहली एक चौथाई अवधि है। व्रत तोड़ने के लिए सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है। व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए। कुछ कारणों की वजह से अगर कोई प्रातःकाल पारण करने में सक्षम नहीं है तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए।

कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दुसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। सन्यासियों, विधवाओं और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।

Share this story