मर्यादा पुरषोत्तम भगवान  श्रीराम ने उड़ाई थी मकर संक्रांति पर पहली पतंग 

Newspoint24.com/newsdesk/

 मकर संक्रांति पर्व का खास महत्व हिन्दू पुराणों में माना  गया है । भक्ति-भाव से भगवान सूर्य की उपासना के साथ साथ , पतंग उड़ने की महान पुरातन परम्परा हैं। देश के तमाम इलाकों में मकर संक्रांति के दिन पतंगबाजी का उत्सव अपने चरम पर होता है  ।  पतंग उड़ाने के पीछे धार्मिक कारण ही नहीं बल्कि वैज्ञानिक पक्ष भी हैं। 

मकर संक्रांति पर जब भगवान सूर्य उत्तरायण का होते हैं  तब सूर्य की किरणें सभी मनुष्यों  के लिए औषधि का काम करती हैं। सर्दी के मौसम में हमारे  के शरीर में कफ बढ़ जाता  है। साथ ही हमारी त्वचा में भी रुखापन आने लगता है। ऐसे में छत पर खड़े होकर पतंग उड़ाने से इन समस्याओं से राहत मिलती है। 

इसके अलावा पतंग उड़ाते समय व्यक्ति का शरीर सीधे सूर्य की किरणों के संपर्क में आता है, जिससे उसे सर्दी से जुड़ी कई शारीरिक समस्याओं से निजात मिलने के साथ विटामिन डी भी पर्याप्त मात्रा में मिलती  है। विटामिन डी शरीर के लिए बेहद आवश्यक है जो शरीर के लिए जीवनदायिनी शक्ति की तरह काम करता है।

वैज्ञानिक तथ्यों के अनुसार, उत्तरायण में सूर्य की गर्मी शीत के प्रकोप व शीत के कारण होने वाले सभी रोगों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। ऐसे में घर की छतों पर जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो सूरज की किरणें एक औषधि की तरह काम करती हैं।

पतंग उड़ाने से दिमाग सदैव सक्रिय बना रहता है। इससे हाथ और गर्दन की मांसपेशियों में लचीलापन आता है। साथ ही मन-मस्तिष्क प्रसन्न रहता है  पतंग उड़ाते समय आंखों की भी एक्सरसाइज होती है। 

भगवान श्रीराम ने की थी पतंग उड़ाने की शुरुआत-


वेदों और पुराणों में उल्लेख है कि मकर संक्रांति पर पहली बार पतंग उड़ाने की परंपरा सबसे पहले मर्यादा पुरषोत्तम भगवान  श्रीराम ने शुरु की थी। तमिल भाषा में लिखित तन्दनानरामायण के अनुसार भगवान राम ने जो पतंग उड़ाई वह वक्त  स्वर्गलोक में इंद्र के पास जा पहुंची थी। भगवान राम द्वारा शुरू की गई इसी परंपरा को आज भी निभाया जाता है।

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