जाने कब है मकर संक्रांति पर स्नान दान का  पुण्यकाल

Newspoint24.com/newsdesk/

भगवान भास्कर के धनु राशि से मकर राशि में आने पर मकर संक्रांति होती है  हैं। 14 जनवरी को मकर संक्रांति ( खिचड़ी ) का पर्व मनाया जा जायेगा । इस अवसर पर स्नान और दान का हिन्दू शास्त्रों में  विशेष महत्व है। काला तिल, उड़द, घी, गुड़, चावल, खिचड़ी और कम्बल दान वाली प्रमुख वस्तुएं हैं। ऐसी मान्यता है कि मकर संक्रांति पर किए गए दान का फल दूसरे  दिनों की अपेक्षा कई गुना अधिक होता  है। दान मनुष्य के जीवन मे सुख समृद्धि लाता है।
माघ मेले का प्रथम  स्नान पर्व मकर संक्रांति गुरुवार से शुरू होगा । इस दिन सूर्य देव दोपहर 2 बजकर 37 मिनट पर शनि की राशि मकर में आएंगे । इसी के  उत्तरायण शुरू हो जाएगा। 

संक्रांति पर स्नान दान पुण्यकाल

संक्रांति पर स्नान दान का पुण्यकाल सुबह 7 बजकर 24 मिनट से शुरू हो जाएगा, जो सूर्यास्त तक है। 


सूर्यदेव प्रकृति में ऊर्जा के मुख्य  स्रोत मने जाते है । सूर्य के उत्तरायण होने से दिन के समय में वृद्धि होने लगती है। प्रकृति का यह परिवर्तन मनुष्यों के स्वास्थ्य और वनस्पतियों के अनुकूल होने लगता है । इसमें शीत को शांत करने की शक्ति होती है। इसलिए हमारे शरीर में जो रोग प्रतिरोधक क्षमता ठंड  से दबी रहती है, वह बढ़ने लगती है। सूर्य की तेज होती रोशनी से तन-मन में स्फूर्ति बढ़ जाती है।

मकर संक्रांति पर सुबह क्या करें 

पानी में तिल मिलाकार स्नान करना चाहिए। इस दिन तीर्थ स्थान या पवित्र नदियों में स्नान करने का महत्व अधिक है। इसके बाद रवि देव की पंचोपचार विधि से पूजन-अर्चन करनी  चाहिए। गंगा घाट ,पवित्र नदियों में या घर में ही पूर्वाभिमुख होकर स्नान कर सूर्य देव के सामने गायत्री मन्त्र जाप करना चाहिए यदि सम्भव होतो एक माला जप अनिवार्य रूप से करें । इसके बाद आदित्यनारायण को तिल और गुड़ से बने सामग्रियों का भोग लगाएं और प्रसाद बांटे। पितरों का तर्पण देना चाहिए।

पुराणों के मुताबिक  शनि देव ने मकर संक्रांति के दिन पिता सूर्य देव को प्रसन्न करने के लिए काले तिल से पूजा की थी। यदि पिता - पुत्र में अनबन चल रही हो तो मकर संक्रांति पर सूर्य देव को तिल अर्पित करने से आपस के सम्बंध मधुर होते हैं। आज के दिन कला तिल, उड़द और चमड़े के जूते दान में देने से शनि दोष दूर होता है। 

Share this story