2021 में एकमात्र सोमवती अमावस्या 12 अप्रैल 2021 को जानें मुहूर्त

Newspoint24.com/newsdesk

सोमवार को पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहा जाता है, जिसका शास्त्रों में सबसे विशेष महत्व बताया गया है।

जानकारों के अनुसार वे सप्ताह के वे वार जो सौम्य माने जाते हैं, उनमें पडऩे वाली अमावस्या शुभ होती है। जबकि सप्ताह के वह वार जो क्रूर माने गए है, उनमें पडऩे वाली अमावस्या अशुभ फल देने वाली होती है।

ऐसे में इस बार चैत्र अमावस्या यानि चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार को पड़ रहा है। सोमवार को होने के कारण जहां एक ओर यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी वहीं ये साल 2021 की इकलौती सोमवती अमावस्या होगी। जिसके चलते यह दिन इस पूरे साल के लिए और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है।

2021 चैत्र अमावस्या मुहूर्त


अमावस्या तिथि आरंभ- 11 अप्रैल 2021 दिन रविवार को प्रातः 06 बजकर 05 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त- 12 अप्रैल 2021 दिन सोमवार को प्रातः 08 बजकर 02 मिनट पर


अमावस्या पर सुबह जल्दी उठकर तीर्थ स्नान करने की परंपरा है। लेकिन यदि ये न हो पाए तो घर में ही गंगाजल मिलाकर नहा सकते हैं। इसके बाद संकल्प लें और भगवान की पूजा कर के जरूरतमंद लोगों को खाने की चीजें और कपड़ों का दान दें।

चैत्र अमावस्या पर कई प्रकार के धार्मिक कार्य किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है की पितरों की मोक्ष प्राप्ति और सद्गति के लिए अमावस्या का व्रत करना चाहिए। माना जाता है कि इस व्रत को करने से न सिर्फ पितरों को मोक्ष और शांति मिलती है बल्कि व्रतधारी को अमोघ फल भी मिलता है।


सोमवती अमावस्या पूजा विधि


मान्यता के अनुसार इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर लें। यदि घर में गंगाजल हो तो नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल अवश्य मिला लें। इसके बाद नए वस्त्र पहनकर प्रभु की आराधना करें। इसके बाद ताम्बे के लोटे में पवित्र जल लेकर सूर्य देव को अर्घ्य देने के बाद पितरों के निमित्त तर्पण करें।

इस दिन उपवास करें और किसी जरूरतमंद को दान-दक्षिणा दें। सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की पूजा का भी विधान है। महिलाएं पीपल के पेड़ में दूध, जल, पुष्प, अक्षत और चंदन से पूजा करें। पीपल में 108 बार धागा लपेट कर परिक्रमा करें और संतान व पति की लंबी आयु की इच्छा करें।

इस दिन ये माना जाता है खास


: पितरों की आत्मा की शांति के लिए उपवास करें और किसी गरीब व्यक्ति को दान-दक्षिणा दें।
: अमावस्या के दिन सूर्य की विशेष रूप से आराधना करनी चाहिए, सूर्य को अर्घ्य इस दिन जरुर दें।
: इस दिन यथाशक्ति अन्न, गौ, स्वर्ण और वस्त्र आदि का दान करना चाहिए।
: पितरों के श्राद्ध के बाद किसी गरीब या ब्राह्मण को भोजन कराना चाहिए।
: अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ के नीचे दीपक और शनि देव को नीले पुष्प, काले तिल और सरसों का तेल चढ़ाना चाहिए।
: सोमवती अमावस्या पर तुलसी का पूजन करें, माना जाता है कि ऐसा करने से सुख सौभाग्य में वृद्धि होती है।
: माना जाता है कि यदि भूखे को भोजन अगर इस दिन कराया जाए तो यह काफी शुभ फलदायी होता है।
: इस दिन ओम का उच्चारण करें। सोमवार का दिन शिव की आराधना का विशेष दिन होता है, ऐसे में इस दिन शिव की पूजा का और भी शुभ फल प्राप्त होता है।

इस दिन ये काम नहीं करने चाहिए 


: अमावस्या के दिन श्मशान घाट पर जाना निषेध माना जाता है, माना जाता है कि इस दिन नकारात्क शक्तियां जागृत होती हैं।
: सोमवती अमावस्या के दिन देर तक नींद लेना वर्जित है
: दंपत्ति इस दिन संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करें।
: अमावस्या के दिन पीपल को छूना वर्जित है। क्योंकि शनिवार के अलावा किसी भी दिन पीपल को छूना वर्जित माना गया है।
: इस दिन मांसहार वर्जित है।
: इस दिन बाल काटने, दाढ़ी बनाने या नाखून काटने की भी मनाही होती है।

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